For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

लघुकथा : त्रिया चरित्र (गणेश जी बागी)

ये साहब बहुत ही कड़क और अत्यंत नियमपसंद स्वाभाव के थे ।  कई दिन रेखा देवी की हाजिरी कट गई |  फटकार लगी सो अलग ।

उस दिन साहब के चैम्बर से तेज आवाज़ें आ रही थीं । रेखा देवी चीखे जा रही थीं, "ये साहब मेरी इज़्ज़त पर हाथ डाल रहा है.."
सब देख रहे थे, ब्लाउज फटा हुआ था । साहब भी भौचक थे । उनकी साहबगिरी और बोलती दोनो बंद थी |


साहब संयत हुए और बोले, "जाओ रेखा देवी.. जब आना हो कार्यालय आना और जब जाना हो जाना, आज से मैं तुम्हें कुछ नही कहनेवाला । वेतन भी पहले जैसा समय से मिलता रहेगा ।.."
मामला सुलझ गया था । रेखा देवी जीत के भाव के साथ चैम्बर से बाहर निकल रही थीं |

(मौलिक व अप्रकाशित)

Views: 3230

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on September 1, 2013 at 7:14pm

मान प्रतिष्ठा का भय तो सताता ही है | सौ फीसदी तो पुरुष वर्ग भी गलत नहीं है | ऐसा ही वाकिया अग्रवाल कॉलेज के तत्कालीन प्रिंसिपल के साथ भी घटित हुआ, जिनकी सज्जनता से सब वाकिफ थे | कहानी एक सच्चाई को  बयान करने में सफल रही है 

इसके लिए हार्दिक बधाई आदरणीय श्री गणेश जी बागी जी 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on September 1, 2013 at 5:57pm

आदरणीय गणेश जी 

महिलाओं का घर की दहलीज़ पार कर बाहर नौकरी करना समाज में कभी भी सुरक्षित नहीं रहा.. जिसके लिए कई कई नियम क़ानून बनाए गए.. 

पर महिलाओं द्वारा बेख़ौफ़ हो उनकी आड़ में ऐसा दुर्-आचरण  अफसरों व सहकर्मी पुरुषों के लिए कितना भारी पढ़ सकता है यह एक चिंता का विषय है...

इस पर कलम रखती सत्य घटना पर आधारित प्रस्तुति के लिए बधाई

सादर.


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on September 1, 2013 at 4:30pm

आपके कार्यालय में हुई  ’उस’ घटना को आपने बहुत ही गंभीरता से कथा-प्रारूप दिया है, गणेशभाईजी.

आपकी इस लघुकथा के नेपथ्य का मैं जानकार रहा हूँ, अतः इस कथा को एक अलग ढंग से पढ़ पा रहा हूँ.

शिल्पगत गंभीरता के लिए आपको हृदय से बधाई.


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on September 1, 2013 at 4:16pm

//is vishay par lagbhag aisi hi laghukatha likhi ja chuki hai, jahan tak mujhe yaad hai aap use laghukatha.com par dekh sakte hain. //

//ab tak padhi hazaron laghukathaaon me kaun si kahan se padhi aur kis lekhak ki thi yah sunishchit hokar kahna bade dimaagwaalon ke liye hi sambhav hai, mere liye thoda mushqil hai //

फिर मेरे को क्यों समुद्र में गोते लगवा रहे हो भाई :-)))))))))


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on September 1, 2013 at 3:11pm

दीपक भाई, यदि पहले से लिखी किसी लघु कथा से यह कथा टकराती है तो यह संयोग ही होगा, यदि लघुकथा का लिंक आप मुझे मेल कर दें तो अति कृपा होगी, यदि सचमुच दोनों लघुकथाओं में समानता होगी तो यह पोस्ट मैं हटा दूंगा । बताना चाहूँगा कि यह लघुकथा यथार्थ की धरातल पर है । 

भाई मैंने विषय कभी ढूंढा ही नहीं, बल्कि विषय स्वतः मिलते रहते हैं और कथाएं जन्म लेती रहती हैं । 

Comment by Sanjay Mishra 'Habib' on September 1, 2013 at 2:03pm

गंभीर विमर्श की धरातल पर खड़ी एक सशक्त लघुकथा के लिए सादर बधाई स्वीकारें आ बागी भाई जी.....

Comment by मोहन बेगोवाल on September 1, 2013 at 1:48pm

 आदरनीय गणेश जी , आप जी लघुकथा बहुत ही खास तरह की समाज में पनप रही मानसिकता की तरफ इशारा करती हे , वो भी समय था जब ऐसी घटना हमारे गावों में होती थी, तो वो पीड़ी  दर पीड़ी साथ नहीं छोडती थी 

Comment by अरुन 'अनन्त' on September 1, 2013 at 12:15pm

आदरणीय भ्राताश्री जय हो , क्या तथ्य उजागर किया है आपने मानसिकता में इतना परिवर्तन हो गया है ऐसी घटनाएँ होने लगी हैं, सोच इतनी गिर चुकी है अधिकतर लोग उपाय की तलाश में रहते हैं कि काश कुछ ऐसा हो जाये कुछ करना भी न पड़े और काम भी बन जाए. हृदयतल से ढेरों ढेरों बधाई स्वीकारें इस लघुकथा पर.


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on September 1, 2013 at 11:18am

आदरणीय गणेश भाई !! बहुत अच्छी लघु कथा !!! हार्दिक बधाई !! आज मर्दों के लिये ये ज्वलंत समस्या है , नये कानून ने समस्या और भी गम्भीर कर दी है ! कानून के दुर उपयोग की सभावना बहुत बढ़ गई है !!

Comment by Shubhranshu Pandey on September 1, 2013 at 10:50am

आदरणीय गणॆश भैया. मेरे एक मित्र के पिता जी के साथ ऎसा ही हुआ था और वो मरते समय तक अदालत से इस केस को लड़ते रहे.....हालात बस ये ही थे..

पहले किसी की इज्जत जाना को सबसे बुरा माना जाता था, लेकिन आज कल है कि,.... बदनाम होंगे तो क्या नाम ना होगा.....ये समस्या पूर्ति का साधन हो गया है. 

ये समस्या अब घर बाहर सभी जगह देखने को मिलने लगी है. झूठे आरोप लगाने वाले  ऎसा ही सोचते हैं कि लोगों की यादाश्त छोटी होती है कुछ दिनों में भूल जायेंगे... इज्जत का क्या है? कौन सा खाना दे रहा है? अब वो जंजीर फ़िल्म का शेरखान नहीं है जो उधार लेने के लिये अपने मूँछ की बाल का सौदा करता था...

सुन्दर कथा..बधाई.

सादर

 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity


सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to जगदानन्द झा 'मनु''s discussion गजल in the group मैथिली साहित्य
"आदरणीय जगदानन्द झा मनु जी, अहाँ बड्ड नीक गजल पठेलियै. सबसे पहिल, त हम प्रयुक्त भेल बहरक विषय में…"
Tuesday
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत हरिगीतिका छंद पर आपकी प्रतिक्रिया से सृजन सफल हुआ है. आपके…"
Saturday
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय श्याम नारायण वर्मा जी सादर, प्रस्तुत छंदों पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हार्दिक आभार.…"
Saturday
जगदानन्द झा 'मनु' added 2 discussions to the group मैथिली साहित्य
Aug 10
Shyam Narain Verma commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"नमस्ते जी, बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति, हार्दिक बधाई l सादर"
Aug 6

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"  आदरणीय अशोक भाईजी, श्रावण मास का आज प्रथम सोमवार है. ऐसे पवित्र दिवस पर आप द्वारा प्रस्तुत…"
Aug 3

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on रोहित डोबरियाल "मल्हार"'s blog post दास्तां
"आदरणीय रोहित डोबरियाल "मल्हार" जी, आपकी भावुक प्रस्तुतीकरण का स्वागत है.  आप…"
Aug 3

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
"  निर्निमेष आँखों की प्रतीक्षा उत्कट तीव्रता के साथ शाब्दिक हुई है, आदरणीय विजय निकोर…"
Aug 3

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"वाह वाह वाह .. सावन की कजरी का आधुनिक रूप गुदगुदा गया, आदरणीय आशीष जी.  सही भी है, प्रकृति के…"
Aug 3
आशीष यादव replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय श्री अशोक कुमार जी इस कजरी पर टिप्पणी के लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद।  आज के परिवेश…"
Jul 27
Ashok Kumar Raktale replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय आशीष यादव जी सादर, सावन की सुंदर और मधुर  फुहारों में यह कजरी की प्रस्तुति  बहुत…"
Jul 27
vijay nikore posted a blog post

सांकल मन के द्वार पर

सांकल मन के द्वार परजब-जब जहाँ कहीं फूल खिलेयाद तुझे किया था हमने ...कहती थी न ..."क्या...तुम्हारे…See More
Jul 27

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service