For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

लुभाये मन गोविंदा

कुण्डलिया छंद

गोविंदा की टोलियाँ, निकल पड़ी चहुँ ओर।

दधि माखन की खोज में, बनकर माखन चोर।।

बनकर माखन चोर, करें लीला बहु न्यारी।

फोड़ें मटकी श्याम, बचाओ गगरी प्यारी।।

द्वापर का वह दृश्य, झांकियां हुई सजिंदा।

राधा रानी संग, लुभायें मन गोविंदा।।

.

-सत्यनारायण सिंह

(मौलिक व अप्रकाशित)

Views: 683

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Satyanarayan Singh on September 1, 2013 at 6:47pm

बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on September 1, 2013 at 4:16pm

द्वापर का वह दृश्य, झांकियां लगती जिन्दा.

वाह वाह वाह

Comment by Satyanarayan Singh on September 1, 2013 at 3:28pm

परम आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम,

                रचना आपको भा गयी यह पढ़कर मन को सुकून मिला अतएव आपका हार्दिक आभार व्यक्त करता हूँ आदरणीय रचना में निहित दोषों के प्रति आगाह करने हेतु भी आपका ह्रदय से धन्यवाद प्रकट करता हूँ.  आदरणीय मूल रचना में  निम्नवत संशोधन कैसा रहेगा

    झांकियां लगती जिन्दा.

Comment by Satyanarayan Singh on September 1, 2013 at 3:05pm

आदरणीय रामशिरोमणि जी सादर,

      आपकी रचना पर प्रेषित  प्रतिक्रिया  भी आदरणीय उतनी ही  मन को प्यारी  लगी है अतएव आपका ह्रदय से आभार प्रकट करता हूँ.


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on September 1, 2013 at 3:28am

कृष्ण के जन्मोत्सव पर आपकी कुण्डलिया भा गयीं, आदरणीय

दधि माखन के खोज में  .........   की खोज में, कि के खोज में 

सजिंदा .............. संज़ीदा ..

शुभ

Comment by ram shiromani pathak on August 30, 2013 at 10:12pm

श्री कृष्ण की तरह आपकी रचना में भी बड़ी प्यारी सी चंचलता  है //हार्दिक बधाई आपको 

Comment by Satyanarayan Singh on August 30, 2013 at 8:56pm

आदरणीय जवाहरलाल  जी,  वसुंधरा  जी, श्याम नारायण जी, गिरिराज  जी, विजय जी, केवल प्रसाद जी, राजेश कुमार जी आप सबका हार्दिक आभार

Comment by राजेश 'मृदु' on August 30, 2013 at 3:44pm

जय हो । बड़ी सुंदर रचना है, सादर

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on August 29, 2013 at 9:15pm

आ0 सत्य नारायण भाई जी, वाह! अतिसुन्दर । हृदयतल से हार्दिक बधाई। सादर,

Comment by विजय मिश्र on August 29, 2013 at 6:16pm
जय जय जय गोविन्दा

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"कुछ सरल से सुधार देखें। क्या गिला वो किसी को भूल गया (“क्या गिला गर किसी को भूल गया”)…"
3 minutes ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आ. भाई दयाराम जी, सादर अभिवादन। सुंदर गजल हुई है। गिरह भी अच्छी हुई है।हार्दिक बधाई।"
6 minutes ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आ.रिचा जी अभिवादन। गजल प्रयास अच्छा हुआ है । लेकिन थोड़ा समय और देने से ये और निखर सकती है। गुणी जनो…"
2 hours ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"अच्छी ग़ज़ल हुई है ऋचा जी। मक्ता ख़ास तौर पर पसंद आया। बहुत दाद    दूसरा शेर भी बहुत…"
8 hours ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"प्रिय लक्ष्मण भाई, अच्छी ग़ज़ल हुई है। बधाई।  //पाप करने पे आ गया जब मैंरब की मौजूदगी को भूल…"
8 hours ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय जयहिंद जी, नमस्कार, अच्छे अशआर हुए हैं। कहीं कहीं कुछ-कुछ परिवर्तन की ज़रूरत लग रही है।…"
8 hours ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"जिसको पाकर सभी को भूल गया  भूल से मैं उसी को भूल गया     राही जिद्द-ओ-जहद में…"
9 hours ago
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"2122, 1212, 112/22 आदमी सादगी को भूल गयाक्या गलत क्या सही को भूल गया गीत गाये सभी तरह के पर मुल्क…"
9 hours ago
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"नमन मंच  सादर अभिवादन "
10 hours ago
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"2122 1212 112 बाप ख़ुद की ख़ुशी को भूल गया आज बेटा उसी को भूल गया १ ज़ीस्त की उलझनों में यूँ…"
10 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। गिरह सहित सुंदर गजल हुई है। हार्दिक बधाई।"
14 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"2122, 1212, 112**बिसलरी पा  नदी को भूल गयाहर अधर तिस्नगी को भूल गया।१।*पथ की हर रौशनी को भूल…"
18 hours ago

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service