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ग़ज़ल : कहीं तो टूटके सीने से दिल बिखरा हुआ होगा

बहर : हज़ज़ मुसम्मन सलीम

१२२२, १२२२, १२२२, १२२२,

तुझे भूला हुआ होगा तुझे बिसरा हुआ होगा,

कहीं तो टूटके सीने से दिल बिखरा हुआ होगा,

बदलता है नहीं मेरी निगाहों का कभी मौसम,

असर छोटी सी कोई बात का गहरा हुआ होगा ,

तनिक हरकत नहीं करता सिसकती आह सुन मेरी,

अगर गूंगा नहीं तो दिल तेरा बहरा हुआ होगा,

जिसे अब ढूंढती है आज के रौशन जहाँ में तू,

तमस की गोद में बिस्तर बिछा पसरा हुआ होगा,

चली आई मुझे तू छोड़ कर चुपचाप राहों में,

तुझे महसूस शायद मुझसे ही खतरा हुआ होगा,

कहा रुकना नहीं जाना पलटकर मैं अभी आई,

अरुन अब तक उसी बारिश तले ठहरा हुआ होगा..

(मौलिक एवं अप्रकाशित)

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सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on August 26, 2013 at 7:58pm

कहा रुकना नहीं जाना पलटकर मैं अभी आई,

अरुन अब तक उसी बारिश तले ठहरा हुआ होगा..

यह एक शेर पूरी ग़ज़ल पर भारी है..  :-)))

दिल से बधाई, भाई. .

Comment by mrs manjari pandey on August 25, 2013 at 4:11pm

     आदरणीय अनन्त जी सुन्देर गज़ल के लिये ढेरों बधाईयां .

Comment by SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR on August 23, 2013 at 10:50pm

बदलता है नहीं मेरी निगाहों का कभी मौसम,

असर छोटी सी कोई बात का गहरा हुआ होगा ,

प्रिय अनंत जी खूबसूरत भाव लिए ...प्रेम को पोषित करते सुन्दर गजल ...रचते रहें
बधाई
भ्रमर ५

Comment by अरुन 'अनन्त' on August 22, 2013 at 2:03pm

हार्दिक आभार अमन भाई जी स्नेह बनाये रखें

Comment by aman kumar on August 20, 2013 at 3:59pm

अब तक उसी बारिश तले ठहरा हुआ होगा.

बहुत दिल लगा कर , लिखा है भाई 

आपका संदेश दिल तक गया है .........सुंदर !

Comment by अरुन 'अनन्त' on August 20, 2013 at 3:55pm

धन्यवाद अनुज राम

Comment by अरुन 'अनन्त' on August 20, 2013 at 3:55pm

बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीया गीतिका जी

Comment by अरुन 'अनन्त' on August 20, 2013 at 3:55pm

नीरज भाई जी दिल से शुक्रिया

Comment by अरुन 'अनन्त' on August 20, 2013 at 3:55pm

हार्दिक आभार आदरणीय जीतेंद्र भाई जी

Comment by अरुन 'अनन्त' on August 20, 2013 at 3:55pm

बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय गिरिराज सर जी

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