For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ज़िंदगी किताब ,आइये पढ़ें 

दर्द बे-हिसाब,आइये पढ़ें 

हंसते चेहरों पे जमी गर्द 

आँखों में सैलाब ,आइये पढ़ें 

सिर्फ काँटों की तिजोरी है 

नाम है  गुलाब ,आइये पढ़ें 

चढ़ते सूरज की हिमाकत 

ढक दिए ख्वाब,आइये पढ़ें 

जब अँधेरे से दोस्ती है तो 

रोशनी खराब ,आइये पढ़ें 

इक परिंदे की उड़ान देखो तो 

ज़िंदगी लाजवाब,आइये पढ़ें 
__________प्रो.विश्वम्भर शुक्ल ,लखनऊ 

(मौलिक और अप्रकाशित )

Views: 406

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by बृजेश नीरज on June 21, 2013 at 9:25am

बहुत सुन्दर रचना! मेरी बधाई स्वीकारें!

Comment by Sumit Naithani on June 20, 2013 at 8:53pm

जब अँधेरे से दोस्ती है तो 

रोशनी खराब ,आइये पढ़ें ....अतिसुन्दर

Comment by वेदिका on June 20, 2013 at 8:32pm

बहुत खूब काव्य चित्रण ..

सिर्फ काँटों की तिजोरी है 

नाम है  गुलाब ,आइये पढ़ें 

 
वास्तविकता को आइना दिखाती हुयी रचना ...बधाई आदरणीय 

 

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on June 20, 2013 at 7:03pm

आ0 विश्वम्भर सर जी,    अतिसुन्दर ’इक परिंदे की उड़ान देखो तो,  ज़िंदगी लाजवाब आइये पढ़ें ’  इक ऊंची उड़ान।   हार्दिक  बधाई स्वीकारें।  सादर,

Comment by Meena Pathak on June 20, 2013 at 5:41pm

बेमिशाल रचना .... हार्दिक बधाई 

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on June 20, 2013 at 3:13pm
सुंदर व वास्तविक रचना....शुभकामनाऐ
Comment by coontee mukerji on June 20, 2013 at 2:26pm

जिंदगी की सच्ची तस्वीर खींचती बहुत सुंदर रचना .

Comment by ram shiromani pathak on June 20, 2013 at 11:24am

सुन्दर  चित्रण किया है अपने आदरणीय //हार्दिक बधाई 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"क्षमा कीजियेगा 'मुसाफ़िर' जी "
2 hours ago
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला आपकी…"
12 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। सुंदर गजल हुई है। भाई रवि जी की सलाह से यह और निखर गयी है । हार्दिक…"
15 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
yesterday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल 2122   1212  22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत में क्या से क्या हो गए महब्बत में मैं…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"  आपका हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी   "
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा एकादश. . . . . पतंग
"आदरणीय सुशील सरनाजी, पतंग को लगायत दोहावलि के लिए हार्दिक बधाई  सुघड़ हाथ में डोर तो,…"
yesterday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय रवि भसीन 'शहीद' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला ग़ज़ल तक आए और हौसला…"
yesterday
Sushil Sarna posted blog posts
Tuesday
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय Jaihind Raipuri जी,  अच्छी ग़ज़ल हुई। बधाई स्वीकार करें। /आयी तन्हाई शब ए…"
Tuesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on रामबली गुप्ता's blog post कर्मवीर
"कर्मवीरों के ऊपर आपकी छांदसिक अभिव्यक्ति का स्वागत है, आदरणीय रामबली गुप्त जी.  मनहरण…"
Tuesday
Jaihind Raipuri posted a blog post

ग़ज़ल

2122    1212    22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत मेंक्या से क्या हो गए महब्बत में मैं ख़यालों में आ गया उस…See More
Tuesday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service