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मैने देखी है.........

मैने देखी है.........


जिंदगी मे मैने बहुत ऊँच नीच देखी है
यहा हर साये मे मैने धूप देखी है ...

कल जो कहता था,मुझ पर कोई एहसान ना करना
चार कंधो पर जाती उसकी सवारी देखी है......

कोई ऐसा ना मिला,माँगा ना हो जिसने आजतक 

बड़े बड़े दानवीरों की मंदिर मे फैली झोलिया देखी हैं.....

वक़्त से बड़ा सिकंदर ना हुआ कोई आज तक
दुनिया जीतने वालों की भी खाली हथेलियाँ देखी हैं......

कुदरत से लड़ परत दर परत सुंदर दिखते हैं जो
सुबह आईने मे उनकी असली तस्वीर देखी है......

दहेज़ का ही मोल है, व्यर्थ की बात की सुंदरता अनमोल है
बहुत खूबसूरत लड़कियों की भी बारातें लौटते देखी हैं......

संस्कार चिता की राख हुए, गंदी से भी घटिया हुई सोच
पत्नी का चौथा हुआ नही, बेटी पर गड़ी वहशी नज़रें देखी है....

खुद खड़े होने के लिए सहारा माँगते ये जुड़े हाथ
इन्ही हाथों मे कयी मासूमो की दबी गर्दनै देखी हैं....

हाथों के लकीरी ज्ञान पर जिंदगी बिताने वालों
बिना बाजू वालों की भी बदलती तकदीर देखी है.....

धेर्रय और इंतज़ार सीखना हो तो आशिकों से सीखो
मरने के बाद भी उनकी आँखे खुली देखी हैं.....

अब ना कोई नेकी करता है,ना दरिया मे है डालता
प्यासे रह गये दरिया, और नदिया सूखते देखी हैं.......

काली घटायें, हल्की बरसात और ठंडी हवाएँ थी
बिना सनम,इस बरसात मे भी तेज़ धूप देखी है...


मैने यहा हर साए मे धूप देखी है....................

[ मौलिक और अप्रकाशित रचना.]

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Comment by pawan amba on February 21, 2014 at 5:40am

दिल से धन्यवाद  विजय मिश्र जी 

  

Comment by विजय मिश्र on February 4, 2014 at 1:24pm
पवनजी , निश्चित रूप से विचलित करने वाले भावों को आपने दिल से रखा है और यह सच है - आज की दुनिया गलिजों से बजबज गले तक भरी है |हर चीज में सौदा है ,हर शख्स सौदायी |बहुत शातिर और तेज नजर पायी है आपने |बधाई इन बेजार और बेबस दुनियाँ की बिडम्बनाओं को दिखाने के लिए |
Comment by pawan amba on February 4, 2014 at 9:02am

दिल से आभार आपका। … Yogyata Mishra ji 

Comment by Yogyata Mishra on January 27, 2014 at 9:44am

बहुत ही अच्छी रचना है आपकी...

Comment by Ashok Kumar Raktale on May 21, 2013 at 10:18pm

वाह आदरणीय वर्तमान परिस्थितियों के अनुसार बहुत सुन्दर रचना की है. बहुत बहुत बधाई स्वीकारें.

Comment by pawan amba on May 17, 2013 at 9:02pm

Pooja Agarwaal ji dhanywaad aapka ..

Comment by pawan amba on May 17, 2013 at 9:02pm

SANDEEP KUMAR PATEL  ji... सतवीर वर्मा 'बिरकाळी' ji... Laxman Prasad Ladiwala...dhanywaad  aap sb kaa.......prayaas karungaa ki  kuch sahi tarike se likh sakun....

Comment by pawan amba on May 17, 2013 at 9:00pm

 विजय मिश्र ji...aapne sahee khaa hai....kuch jyada hi hai.....chhma maangne ki koi baat hi nahi hai...aap log kuch bataoge tabhi to seekhenge.....aage se dhyaan rakhungaa....dil se abhaar aapka...

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on May 16, 2013 at 7:38pm

जो भी देखा अनुभव किया जीवन भर उसको लिखा सटीक और सच सच 

जीवन की अनुभूति की प्रस्तुति के लिए बधाई श्री पवन अम्बा जी 

Comment by सतवीर वर्मा 'बिरकाळी' on May 16, 2013 at 6:54pm
बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति आ॰ पवन अम्बा जी।

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