For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

माँ की भेट चढाने दो ,

मुझे सपनो में जीने दो ,
हकीकत में कुछ कर नहीं पाता ,
झूठ मूठ झुंझलाता हूँ ,
लड़ मरने की चाहत मन में हैं ,
डर के मगर भाग जाता हूँ ,
जो कर नहीं पाता जाग जाग ,
वो सोकर मैं कर जाता हूँ ,
मुझे सपनो में जीने दो ,
आज सपने में डी राजा को ,
बहुत बहुत समझाया ,
बोला अरे ओ अनाड़ी,
ये क्या कर डाला ,
अरबो की गई हिंद के प्यारे ,
तूने कितना बनाया ,
झट से बोला वो मुझसे ,
गुरु जीवन सफल बनाया ,
जो हैं बाते वो ,
अब खुल कर हो जाने दो ,
मुझे सपनो में जीने दो ,
अगले पल मुलकात हुई ,
नेता जी संग बापू थे ,
बापू की आखों में आसू ,
देख कर मैं घबरा गया ,
नेता जी पर नजर पड़ी तो ,
मेरा सर चकरा गया ,
हाथ में थी तलवार ,
और बोले बापू से ये बाणी ,
अब इन गद्दारों को ,
माँ की भेट चढाने दो ,
मुझे सपनो में जीने दो ,

Views: 401

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Rash Bihari Ravi on December 9, 2010 at 1:28pm
dhanyabad asha ji
Comment by asha pandey ojha on December 8, 2010 at 11:49pm
हाथ में थी तलवार ,
और बोले बापू से ये बाणी ,
अब इन गद्दारों को ,
माँ की भेट चढाने दो ,
bahutkhoob .. sateek .. ek peeda ... मुझे सपनो में जीने दो
Comment by Rash Bihari Ravi on December 6, 2010 at 5:40pm
dhanyabad sir ji

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on November 21, 2010 at 10:23am
मुझे सपनो में जीने दो ,
हकीकत में कुछ कर नहीं पाता,

सीधी बात, सटीक शब्दों मे, सुंदर रचना , बधाई गुरु जी !

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post कुंडलिया. . . . झोला
"आ. भाई सुनील जी सुंदर कुंडलियां हुई हैं हार्दिक बधाई।"
2 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted blog posts
4 hours ago
sushil yadav posted blog posts
Oct 26
Sushil posted blog posts
Oct 26
vijay nikore posted a blog post

अनसुने अनकहे के बीच

                        अनसुने अनकहे के बीच.कहे अनसुने-से रहे कुछ जज़्बातउसपर अनकहे एहसासों का…See More
Oct 26
रोहित डोबरियाल "मल्हार" replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"1 लाख मासिक चाहिए ही क्यों भाई, वर्डप्रेस CRM में वेबसाइट को ट्रांसफर कर दिया जाए, तो सालाना खर्च…"
Oct 15
KALPANA BHATT ('रौनक़') replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"दुःखद"
Sep 29
Profile IconKamran Akmal and sushil yadav joined Open Books Online
Sep 24
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"🌹 OBO के पुनर्गठन एवं पुनर्जीवन के लिए एक सशक्त अपील और कुछ रचनात्मक…"
Sep 22
Dharmendra Kumar Yadav posted blog posts
Sep 19
Sushil Sarna posted a blog post

कुंडलिया. . . . झोला

कुंडलिया. . . . झोलाझोला   लेकर  हाथ  में, चले   मुरारी   लाल । भाव देख कर थम गई,  उनकी बढ़ती चाल…See More
Sep 19
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"सभी को मिलकर ओबीओ को बचाने का सतत प्रयास करते रहना चाहिए।"
Sep 17

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service