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गीत: मैं नहीं.... संजीव 'सलिल'

गीत:


मैं नहीं....


संजीव 'सलिल'

*

मैं नहीं पीछे हटूँगा,

ना चुनौती से डरूँगा.

जानता हूँ, समय से पहले

न मारे से मरूँगा.....

*

जूझना ही ज़िंदगी है,

बूझना ही बंदगी है.

समस्याएँ जटिल हैं,

हल सूझना पाबंदगी है.

तुम सहायक हो न हो

खातिर तुम्हारी मैं लडूँगा.

जानता हूँ, समय से पहले

न मारे से मरूँगा.....

*

राह के रोड़े हटाना,

मुझे लगता है सुहाना.

कोशिशोंका धनी हूँ मैं,

जानता अवसर भुनाना.

शूल वरकर, फूल तुमपर

वार निष्कंटक करूँगा.

जानता हूँ, समय से पहले

न मारे से मरूँगा.....

*

जो चला है, वह गिरा है,

जो गिरा है, वह उठा है.

जो उठा, आगे बढ़ा है-

उसी ने कल को गढ़ा है.

विगत से आगत तलक

अनथक तुम्हारे सँग चलूँगा.

जानता हूँ, समय से पहले

न मारे से मरूँगा.....

*

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Comment

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मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on November 17, 2010 at 9:04am
बहुत ही ओजपूर्ण नवगीत है | रुचिकर लगा |

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Rana Pratap Singh on November 15, 2010 at 2:14pm
बहुत सुन्दर और प्रेरणादायी नवगीत|

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