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लघुकथा : उत्तर की तलाश

एक मित्र ने पूछा, "तुम कब पैदा हुए थे ?"

"शायद तब जब लाल  बहादुर शास्त्री प्रधानमंत्री थे, नहीं शायद गुलजारी लाल नन्दा या इंदिरा में से कोई प्रधानमंत्री था," मैंने उत्तर दिया।

"तुम्हें इतना भी याद नहीं।"

"बच्चा था न- दुनियादारी, राजनीति, से दूर"

"अब क्या हो?"

"अब भी एक इंसान हूं-छल, कपट, राजनीति, माया-मोह में जकड़ा"

"मगर इंसान हो ?"

"हां"

"पर कैसे ? इंसानों के कौन से लक्षण हैं तुममें ?"

मैं चुप रहा, कुछ सोचा फिर उत्तर की जगह मैंने एक प्रश्न दाग दिया, "तुम क्या हो ?"

मित्र खामोश था । वह शायद जानता था कि आगे फिर मैं उसका अगला प्रश्न ही दोहराने वाला हूँ ।

एक सीधे प्रश्न के उत्तर की तलाश में हम देर तक एक दूसरे को देखते रहें |

आज भी उत्तर तलाश रहे हैं कि इंसानों के कौन से लक्षण हैं हममें ?

                                                                                       - बृजेश नीरज

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Comment by बृजेश नीरज on February 27, 2013 at 5:40pm

 Pawan Amba ji, Thanks for appreciation!

Comment by बृजेश नीरज on February 27, 2013 at 5:39pm

सतवीर जी, आपका आभार! आपकी हौसला अफज़ाई से लिखने का साहस बढ़ा!

Comment by सतवीर वर्मा 'बिरकाळी' on February 27, 2013 at 5:34pm
हम इंसान हैं पर इंसान नहीं है। आज मानव आकार रुप में तो इंसान के जैसा दिखता है पर उसके अन्दर जो मानवीय गुण और संवेदना होनी चाहिए वो नहीं है। आपके उत्तर की तलाश आज हर किसी को है पर मिल नहीं रहा। बहुत ही प्रभावपूर्ण रचना, धन्यवाद।
Comment by pawan amba on February 27, 2013 at 4:22pm

sach kahi......bahut sundar likha ....aapne 

Comment by बृजेश नीरज on February 27, 2013 at 9:37am

 Shubhranshu Pandey ji आपका आभार! 

Comment by Shubhranshu Pandey on February 27, 2013 at 12:05am

जो दिल ढ़ूढा आपनो मुझसे बुरा ना कोय...

एक सशक्त कहानी..

बधाई

Comment by बृजेश नीरज on February 25, 2013 at 11:16pm

आदरणीय सौरभ जी
आपका बहुत आभार! आपको रचना पसन्द आयी लेखन सार्थक हुआ।
सादर!


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on February 25, 2013 at 10:31pm

एक अच्छी और सांकेतिक लघुकथा के लिए बधाई.. .

Comment by बृजेश नीरज on February 25, 2013 at 10:03pm

संदीप जी आपका बहुत धन्यवाद!

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on February 25, 2013 at 8:23pm

एक दम सच से सामना कराता है ये प्रश्न देखने सुनने में बड़ा सहज और सरल हो सकता है किन्तु इसका उत्तर बहुत ही जटिल .........बधाई हो आदरणीय

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