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*****(श्रद्धा सुमन)*****

'दामिनी' चली गई दुनियां से 
छोड़ गई कितने सवाल
क्या लड़की होना ही था 
उसका घोर अपराध ?
जब तक फाँसी पर न लटकेंगे 
उसके अपराधी 
शांत न होगी रूह उसकी 
कब होगा इन्साफ 
कितने सपने संजोए होंगे 
कितने देखे होंगे ख़्वाब 
पूरे हुए,न रहे अधूरे 
जिंदगी ने छोड़ा साथ 
कानून की देवी की जो खुली न 
अब भी अखियाँ बंद 
तवाही मच जाएगी धरा पर 
सब हो जाएगा बर्वाद 
 
दीपक कुल्लुवी 
29 दिसंबर 2012

Views: 456

Comment

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Comment by Deepak Sharma Kuluvi on December 31, 2012 at 11:38am

sabka hardik dhanyabad

Comment by JAWAHAR LAL SINGH on December 31, 2012 at 7:31am

उसकी कुर्बानी ब्यर्थ न जाय! न्याय हो ...यही होगी सच्ची श्रद्धांजलि!


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on December 30, 2012 at 10:25am

जो कुछ हुआ, वो अन्दर तक हिलाकर रख दिया, ऐसा लग रहा है जैसे हम सब दिन प्रतिदिन राक्षसी समाज का निर्माण कर रहे हैं, आखिर कैसे कोई इतना बहशी हो सकता है, जरुर उन सबके खून में दानवी लहू शामिल होगा |

भगवान दामिनी की आत्मा को शान्ति दे, और हमारे तंत्र को ऐसी इच्छा शक्ति दें कि उन कमीनों को फ़ासी पर शीघ्र लटका सके |

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on December 29, 2012 at 6:36pm

कानून की देवी की जो खुली न 
अब भी अखियाँ बंद , कब होगा इन्साफ 

उसका शहीद होना, मानवता पर कलंक है 
प्रफ्भु उसकी आत्मा को शांति दे 
Comment by Shyam Narain Verma on December 29, 2012 at 5:07pm

BAHUT MARMIK

DHANYAWAD

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