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1 - 8 !
*******
अगरबत्ती 
महकता जीवन 
जब जलती .
-------
धुआं ही धुआं 
तेरी यादों का तन 
जब भी छुआ ..
--------
लगे जताने 
छलकते पैमाने 
लोग सयाने ..
-------
जाम  छलके 
हलक तर हुआ 
हुए हलके 
-------
जानवर है 
क्या बिगाड़ पाओगे !
नामवर है ..
------
कागज़ी घोड़े 
चाबुक रिश्वत की 
रुकते थोड़े!
------
खबरें पढ़ी 
अखबार बिछाया 
नींद दो घडी ..
-----
जलता दीया 
लपलपाती बाती 
नाजुक हीया 
---------------------------------
अविनाश बागडे...

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Comment

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Comment by AVINASH S BAGDE on November 3, 2012 at 8:40pm
मेरे हाइकू ने आप के ह्रदय को स्पर्श किया 
आभार डॉक्टर प्राची जी 
आभार राजेश कुमारी मैम 

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on November 2, 2012 at 8:47pm

कागज़ी घोड़े 

चाबुक रिश्वत की 
रुकते थोड़े!
------
खबरें पढ़ी 
अखबार बिछाया 
नींद दो घडी-----------ये दोनों हाइकु बहुत ख़ास लगे

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on November 2, 2012 at 8:45pm

अविनाश बागडे जी सभी हाइकु शानदार व् सार्थक हैं बधाई आपको 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on November 2, 2012 at 6:09pm

बहुत बढ़िया हाइकू आ. अविनाश बागडे जी 

कागज़ी घोड़े 

चाबुक रिश्वत की 
रुकते थोड़े!...............सही बात 
हार्दिक बधाई 
Comment by AVINASH S BAGDE on November 2, 2012 at 12:45pm

आभार shalini kaushik mam..

Comment by AVINASH S BAGDE on November 2, 2012 at 12:45pm

आदरणीय Vinita Shukla  जी आभार 

Comment by AVINASH S BAGDE on November 2, 2012 at 12:44pm

आदरणीय सौरभ जी ..बहुत बहुत शुक्रिया


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on November 2, 2012 at 11:16am
भाई अविनाशजी, आपके हाइकू अच्छे बन पड़े हैं.  इस प्रस्तुति से इन दो हाइकुओं पर आपको विशेष धन्यवाद कह रहा हूँ.
जानवर है 
क्या बिगाड़ पाओगे !
नामवर है ..      
खबरें पढ़ी 
अखबार बिछाया 
नींद दो घडी ..
पुनः बधाई.. .
Comment by Vinita Shukla on November 2, 2012 at 8:46am

सुन्दर हाइकू, प्रभावी अभिव्यक्ति के साथ; बधाई आ. अविनाश जी.

Comment by shalini kaushik on November 2, 2012 at 12:33am

nice presentation 

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