For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

आज डूबते हुए सूरज को एक बार फिर देखा,
लालिमा से भरा सूरज अलविदा कहता हुआ,
अब सूरज छुप जाएगा बस कुछ ही पलों में,
और आकाश में दिखने लगेगा चाँद वो सुंदर सा,


कभी कभी ये भ्रम भी होने लगता है,
की क्या चाँद और सूरज अलग अलग हैं,
या सूरज ही रूप रंग बदल लौट आता है,
और दो किरदार निभाता है अलग अलग तरह के,
जैसे फिल्मों में एक ही आदमी दो हो जाता है एक होते हुए भी,

आखिर क्यों नहीं ये दोनों एक साथ दिखते हैं,
ये सोचते सोचते ही नज़र खोजने लगी आकाश में,
सूरज अभी डूबा नहीं था,
और उधर बहुत दूर सूरज से चाँद दिखने लगा था,
मानो सूरज से अपने अलग होने का प्रमाण देने आया हो,

दोनों एक ही से हैं, फिर भी ये दूरी सी क्यों है,
दोनों का घर भी एक ही आकाश है फिर भी साथ क्यों नहीं,
ये आकाश इनके पिता की जायदाद रहा हो शायद,
बटवारे में आकाश बटा होगा तो दिल भी बट गए होंगे,

बटवारे सिर्फ जायजाद ही कहाँ बाटते हैं,
बटवारे छीन लेते हैं, दिलों के एहसास भी,
बटवारे जो एक को दो कर देते हैं,
वो भला दो को एक रखें कैसे,
अब आज कुछ कुछ खुलने लगा है राज़,
एक से होते हुए भी इनके अलग अलग रहने का......

Views: 252

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on October 4, 2012 at 10:16am

समाज में, परिवार में, घटित होती सच्चाइयों को प्रकृति के सापेक्ष रख कर देखना, व सुन्दर बिम्बों के माध्यम से उनको व्यक्त करना अभिव्यक्ति की रोचकता में चार चाँद लगा देता है. इस हेतु बधाई.

Comment by satish mapatpuri on October 4, 2012 at 1:32am

बटवारे सिर्फ जायजाद ही कहाँ बाटते हैं,
बटवारे छीन लेते हैं, दिलों के एहसास भी,
बटवारे जो एक को दो कर देते हैं,
वो भला दो को एक रखें कैसे, ......... बँटवारा वो चाहे परिवार का हो , समाज का हो , राष्ट्र का हो या दिलों का हो कष्टकारी होता ही है . अवमूल्यन के इस दौर में हर क्षेत्र में ह्रास हुआ है , चाहे वह नैतिक मूल्य हो , भाई चारा हो , फ़र्ज़ हो या कुछ और . जैसे - जैसे हम आत्म केन्द्रित होते गए ..... स्वार्थ के वशीभूत होते गए .... वैसे - वैसे हर रिश्तों से कटते गए .... संयुक्त परिवार अब सामाजिक शास्त्र का पाठ बन चुका है . ..... आपने बंटवारे की बात सूरज - चाँद एवं उनके पिता आकाश के माध्यम से कहकर आज के इंसानी समाज को दर्पण दिखाया है . .... इस खुबसूरत प्रस्तुति के बधाई पियूष जी

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"आ. भाई सालिक गणवीर जी, सादर अभिवादन।गजल पर उपस्थिति व सराहना के लिए हार्दिक धन्यवाद।"
33 seconds ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"आ. भाई सौरभ जी व समर जी , सादर अभिवादन। आपके विचारों से दुविधा दूर हुई और नया कुछ सीखने को मिला ।…"
3 minutes ago
Sanjay Shukla replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"आदरणीय डंडापानी जी, बहुत धन्यवाद"
30 minutes ago
Sanjay Shukla replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"आदरणीय सालिक जी, बहुत धन्यवाद"
31 minutes ago
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"आदरणीया दीपांजली जी बहुत शुक्रिया आपका सादर।"
34 minutes ago
Sanjay Shukla replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"आदरणीया रचना जी, बहुत धन्यवाद"
34 minutes ago
Deepanjali Dubey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"आदरणीय समर कबीर सर जी सादर प्रणाम। मुझे पता नहीं था इसलिए अलग से संशोधित ग़ज़ल पोस्ट कर दी थी। अगर…"
4 hours ago
Deepanjali Dubey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"आदरणीया ऋचा यादव जी नमस्कार आदरणीय समर सर जी की इस्लाह के बाद ग़ज़ल ख़ूबसूरत हुई है बधाई स्वीकार…"
4 hours ago
Deepanjali Dubey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"आदरणीय dandpani nahakजी सादर प्रणाम। ग़ज़ल तक आने के लिए हार्दिक आभार आदरणीय।"
5 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"चलिए, आदरणीय, एक बात तो स्पष्ट हुई कि धुआँ शब्द को लेकर लिपि की कोई दखल नहीं है. बल्कि, आप भाषा के…"
5 hours ago
Deepanjali Dubey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"आदरणीय सलिक गणवीर जी सादर प्रणाम। ग़ज़ल पर ग़ौर करने के लिए सादर धन्यवाद। आदरणीय समर कबीर जी के…"
5 hours ago
Deepanjali Dubey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"आदरणीय समर कबीर जी सादर प्रणाम।आपकी बेहतरीन इस्लाह के लिए सादर धन्यवाद आदरणीय। मैंने आदरणीय संजय जी…"
5 hours ago

© 2021   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service