For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

**********************************

दिख रही वो ज़िन्दगानी और है;

मुझ पे जो बीती कहानी और है;

ख़ाक कर डाला मगर हम पर अभी,

इक क़यामत उसको ढानी और है;

कम न थीं पहले ही तेरी हरकतें,

और अब ये बदज़ुबानी और है;

दांव सारे आज़मा हम हैं चुके,

आख़िरी बाज़ी लगानी और है;

कश्तियाँ मझधार से लड़ आईं पर,

इक लहर आती तूफ़ानी और है;

भर गया जी इस जहाँ से अब मुझे,

इक नई दुनिया बनानी और है;

वो जवां थे मर मिटे इस मुल्क पर,

आज की ये नौजवानी और है;

ये सियासत का है मरकज़ आज भी,

देश की पर राजधानी और है;

मशवरे देता रहे 'वाहिद तमाम,

अपने जी में हमने ठानी और है;

Views: 581

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by संदीप द्विवेदी 'वाहिद काशीवासी' on July 14, 2012 at 11:17am

मित्र वीनस जी,

मैं अगर इस तरह से ग़ज़ल कहने में कुछ हद तक सफल हो पाया हूँ तो इसमें आपका ही योगदान सर्वाधिक है| आपके सुझावों पर अमल करने के प्रयास में लगा हुआ हूँ शीघ्र ही प्रभाव दिखने लगेगा| :-))

Comment by संदीप द्विवेदी 'वाहिद काशीवासी' on July 14, 2012 at 11:12am

आपका हार्दिक धन्यवाद डॉ. साहिब.. 'तूफ़ानी' में 'तू' को गिरा कर 'तु' पढ़ा है.. मेरे ख़याल से ये कहन में निकल चलेगा.. 'लेकिन' और 'पर' के बीच के अंतर पर अवश्य विचार करूँगा हालाँकि यह भी मुझे 'चलेबल' लग रहा है :-))| सराहना के लिए पुनश्चः धन्यवाद..

Comment by वीनस केसरी on July 14, 2012 at 2:22am

वाह वा संदीप जी

क्या कहने एक से बढ़ कर एक शेर के लिए बधाई स्वीकारें

इस ग़ज़ल पर पहले भी काफी बात हो चुकी है आज पुनः देखा तो सोचा कमेन्ट भी कर ही दिया जाए, ताकि सनद रहे और वक्त पर काम आवे ...... हा हा हा

Comment by डॉ. सूर्या बाली "सूरज" on July 14, 2012 at 1:22am

वाहिद भाई खूबसूरत ग़ज़ल के लिए आपको बहुत सारी दाद देता हूँ। अच्छी ज़मीन पर अच्छी ग़ज़ल कही है आपने ! तूफानी शब्द  बहर से थोड़ा खटक रहा है....और ग़ज़ल में "लेकिन" के भाव के लिए "पर" शब्द प्रयोग करना कहन तक उचित है इसे देख लीजिएगा। एक बार पुन: आपको मुबारकबाद !!

Comment by संदीप द्विवेदी 'वाहिद काशीवासी' on July 12, 2012 at 12:17pm

अपने ख़ास अंदाज़ में प्रोत्साहन हेतु आपका हार्दिक धन्यवाद दीप जी! आपकी हर दाद क़ुबूल है! :-)

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on July 12, 2012 at 12:10pm

वाह वाह
एक एक शेर की अपनी जुबानी है लाजवाब
शानदार ग़ज़ल और जानदार ग़ज़ल कही है संदीप भाई जी
इस बेहतरीन ग़ज़ल के लिए ढेरों दाद क़ुबूल कीजिये

Comment by संदीप द्विवेदी 'वाहिद काशीवासी' on July 12, 2012 at 10:43am

आदरणीया राजेश कुमारी जी,

ग़ज़ल आपको पसंद आई इसके लिए आपका हार्दिक आभार व्यक्त करता हूँ|

Comment by संदीप द्विवेदी 'वाहिद काशीवासी' on July 12, 2012 at 10:42am

हौसलअफ़ज़ाई के लिए आपका तहे दिल से शुक्रिया उमाशंकर जी!!

Comment by संदीप द्विवेदी 'वाहिद काशीवासी' on July 12, 2012 at 10:41am

आदरणीय सौरभ भईया,

आपकी पारखी दृष्टि से मिली सराहना निश्चय ही एक सम्मान के समान है| दरअस्ल ये ग़ज़ल ग़ालिब की एक ग़ज़ल से प्रेरित है और तरही मुशायरे की तर्ज पर उनके एक मिसरे 'अपने जी में हमने ठानी और है' को लेकर लिखी गई है| :-))

सादर,

Comment by संदीप द्विवेदी 'वाहिद काशीवासी' on July 12, 2012 at 10:39am

सादर भ्रमर भाई.. आपका उत्साहवर्धन सदैव ही एक नवीन ऊर्जा का संचार करता है! हार्दिक आभार..!

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"आ. भाई सुशील जी , सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय पर सुंदर दोहा मुक्तक रचित हुए हैं। हार्दिक बधाई। "
Sunday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"आदरणीय अजय गुप्ताअजेय जी, रूपमाला छंद में निबद्ध आपकी रचना का स्वागत है। आपने आम पाठक के लिए विधान…"
Sunday
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"आदरणीय सौरभ जी सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार आदरणीय जी ।सृजन समृद्ध हुआ…"
Sunday
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"आदरणीय सौरभ जी सृजन आपकी मनोहारी प्रतिक्रिया से समृद्ध हुआ । आपका संशय और सुझाव उत्तम है । इसके लिए…"
Sunday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"  आदरणीय सुशील सरना जी, आयोजन में आपकी दूसरी प्रस्तुति का स्वागत है। हर दोहा आरंभ-अंत की…"
Sunday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"  आदरणीय सुशील सरना जी, आपने दोहा मुक्तक के माध्यम से शीर्षक को क्या ही खूब निभाया है ! एक-एक…"
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

देवता क्यों दोस्त होंगे फिर भला- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"

२१२२/२१२२/२१२ **** तीर्थ  जाना  हो  गया  है सैर जब भक्ति का हर भाव जाता तैर जब।१। * देवता…See More
Sunday
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"अंत या आरंभ  --------------- ऋषि-मुनि, दरवेश ज्ञानी, कह गए सब संतहो गया आरंभ जिसका, है अटल…"
Saturday
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"दोहा पंचक  . . . आरम्भ/अंत अंत सदा  आरम्भ का, देता कष्ट  अनेक ।हरती यही विडम्बना ,…"
Saturday
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"दोहा मुक्तक. . . . . आदि-अन्त के मध्य में, चलती जीवन रेख ।साँसों के अभिलेख को, देख सके तो देख…"
Saturday
vijay nikore commented on vijay nikore's blog post सुखद एकान्त है या है अकेलापन
"नमस्ते, सुशील जी। आप से मिली सराहना बह्त सुखदायक है। आपका हार्दिक आभार।"
Saturday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा एकादश. . . . . पतंग

मकर संक्रांति के अवसर परदोहा एकादश   . . . . पतंगआवारा मदमस्त सी, नभ में उड़े पतंग । बीच पतंगों के…See More
Jan 14

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service