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पता ही पूछ लेते आप भी मयखाने का

दिखा है आइने में अक्स जो अंजाने का
कोई किरदार था भूले हुए अफ़साने का

मुझे जिसने भुलाया चार दिन की चाहत कर
वही अब ढूंढता है इक बहाना आने का

शराबी मिल गया गुजरात की गलियों में गर
पता ही पूछ लेते आप भी मयखाने का

जरा सी बात पर रूठे सता के बोले वो
मजा कुछ और ही है इश्क में इतराने का

बुझा जिसको दिया था फूंक से मोहब्बत की
जला है दीप वो अब आज फिर वीराने का

संदीप पटेल "दीप"

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Comment

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Comment by अरुण कान्त शुक्ला on June 13, 2012 at 7:17pm

पंजाब की गलियों में मिलेंगे बहुत पियक्कड़ ,

काँधे पर वहाँ पोलिस ने जो लिखा रखा है पी पी ,

उम्दा गजल ,..

Comment by Yogi Saraswat on June 12, 2012 at 10:57am

जरा सी बात पर रूठे सता के बोले वो
मजा कुछ और ही है इश्क में इतराने का

बुझा जिसको दिया था फूंक से मोहब्बत की
जला है दीप वो अब आज फिर वीराने का

वाह ! बहुत सुन्दर ग़ज़ल श्री दीप जी ! बहुत खूब

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on June 12, 2012 at 9:21am

bahut bahut aabhari hun sir ji aadarneey PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA sir ji ....

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on June 11, 2012 at 12:38pm

बुझा जिसको दिया था फूंक से मोहब्बत की
जला है दीप वो अब आज फिर वीराने का

सुन्दर अभिव्यक्ति हेतु बधाई,  आदरणीय संदीप जी  सादर 

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