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मन मेरे
हिम्मत न हार
जय तेरी होगी|
निरंतर अग्रसर हो
कर्म के पथ पर,
प्रत्याशा के रथ पर
मिटा के अंतर्द्वंदों को
त्याग आलस्य को,
घातक नैराश्य को
तुझमें नैर्गुण्य नहीं,
तू बिलकुल शून्य नहीं
तुझमें भी क्षमता है
अपनी महत्ता है|
स्वयं की पहचान कर
खुद पर अभिमान कर,
शंखनाद कर दे
अस्तित्व के संग्राम का,
भय क्या परिणाम का
निर्भीकता शस्त्र है
मार्ग प्रशस्त है,
कल्पना के चित्र को
यथार्थ पर उकेर,
समय तेरे साथ है
निरर्थक है देर|

 

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Comment by कुमार गौरव अजीतेन्दु on June 9, 2012 at 6:41am
आपका हार्दिक आभार महिमा जी...
Comment by MAHIMA SHREE on June 8, 2012 at 10:56pm

कुमार गौरव जी ... उर्जा का संचार करती रचना बधाई आपको

Comment by कुमार गौरव अजीतेन्दु on June 8, 2012 at 4:08pm
आदरणीय अरुण जी, आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।
Comment by कुमार गौरव अजीतेन्दु on June 8, 2012 at 4:05pm
आदरणीय कुशवाहा सर, आपका प्यार हमेशा मेरा उत्साहवर्धन करता है। धन्यवाद।
Comment by अरुण कान्त शुक्ला on June 8, 2012 at 2:15pm

अच्छी रचना .. बधाई .

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on June 8, 2012 at 1:01pm

प्रिय कुमार जी, सस्नेह 

प्रेरणा देती हुई रचना. उत्साह भर गया. बधाई.

Comment by कुमार गौरव अजीतेन्दु on June 7, 2012 at 10:56pm

जी बिलकुल सही कहा आपने खत्री जी| ओ बी ओ एक बेहद अच्छा मंच है अपनी प्रतिभा को निखारने का, और ये बिलकुल अपना सा लगता है|

Comment by Albela Khatri on June 7, 2012 at 10:50pm

भाई मेरे कुमार  गौरव अजितेंदु जी,

टेलीविज़न वाले तो  मुँह पर चूना पोत देते हैं
और कोल्हू के बैल  की भान्ति  जोत  देते हैं
यहाँ तो जैसे एक संयुक्त परिवार है
ओ बी ओ का  अपना सुसंस्कार है
बस प्यार ही प्यार है ...प्यार ही प्यार है
____इस प्यार का आनन्द लो ........मज़े करो.......जय हो !

Comment by कुमार गौरव अजीतेन्दु on June 7, 2012 at 10:40pm

आदरणीय अलबेला खत्री जी

मुझे तो विश्वास नहीं हो रहा कि इस मंच के माध्यम से मुझे आपसे मुलाकात हो गई|
आपको टेलीविजन पर देखता था, आपसे ऐसे बात करने का अवसर मिलेगा ये तो सोचा ही नहीं था|
बहुत अच्छा लगा आपकी प्रतिक्रिया से| आगे भी स्नेह बनाये रखियेगा|
Comment by Albela Khatri on June 7, 2012 at 9:54pm

वाह वाह कुमार गौरव  अजितेंदु  जी,
शानदार ओजस्वी कविता प्रस्तुत करने के लिए  अभिनन्दन

बधाई !

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