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पूरे मोहल्ले में यह चर्चा थी कि गुड़िया को एड्स की बीमारी है | दरअसल उसका पति एक सरकारी मुलाज़िम था जो कि सिर्फ़ २५ वर्ष की आयु में ही अचानक किसी रहस्यमयी बीमारी का शिकार होकर दुनिया छोड़ गया था | एड्स पर काम कर रही एक स्वयंसेवी संस्था के कार्यकर्ता बहुत समझा-बुझा कर गुड़िया को एड्स की जाँच करवाने अपने साथ ले गए थे | गुड़िया को जो सरकारी पेंशन मिलती थी उसी से किसी तरह अपना जीवन यापन कर रही थी |
 
जाँच करने वाले डॉक्टर ने बड़ी हैरानी से पूछा कि रिपोर्ट में तो तुम्हें कोई बीमारी नहीं है, तुम तो बिल्कुल स्वस्थ हो, फिर यह एड्स का अफ़वाह क्यों ? तुम लोगों को मुँहतोड़ जवाब क्यों नहीं देती ? हाथ जोड़ कर गुड़िया बोली,"डॉक्टर साहिब, आप से विनती है यह बात किसी से भी मत कहिएगा, एक जवान बेवा अपनी इज़्ज़त खूँखार भेड़ियों से अभी तक इसी अफ़वाह के सहारे ही बचाती रही है, भगवान् के लिए मेरा यह कवच मुझ से मत छीनिए...... !"

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मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on April 21, 2012 at 3:59pm

सराहना हेतु आभार प्रिय संदीप द्विवेदी जी |

Comment by Shubhranshu Pandey on April 20, 2012 at 11:58am

एक दम से लौंगिया मिर्चाइ. .....

परदा (यशपाल) कहानी में परिवार की इज्जत बचाने के लिये मिर्जा साहब ने मखमल का परदा लगाया था. आज गुडिया ने अपनी इज्जत बचाने के लिये एड्स का परदा लगाया है..........

बहुत खूब....

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on April 18, 2012 at 11:12pm

samaj ke munh par karara tamacha. nari ko apne bachav ke liye kavach, badhai sir ji sadar abhivadan ke sath. 

Comment by संदीप द्विवेदी 'वाहिद काशीवासी' on April 17, 2012 at 6:28pm

समाज का कटु यथार्थ बड़े ही सुंदर ढंग से पेश किया आपने आदरणीय| बधाई आपको :-)


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on April 17, 2012 at 3:40pm

राकेश जी , आभार |


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on April 17, 2012 at 3:40pm

आदरणीय जीतेन्द्र जौहर जी, लघु कथा पढ़ने और सराहने हेतु बहुत बहुत आभार, आपकी टिप्पणी उत्प्रेरक का काम करती है |

Comment by राकेश त्रिपाठी 'बस्तीवी' on April 17, 2012 at 2:22pm

Bahut hi samsamayik evam hruday ko uddelit kar dene vali kahani.

Comment by Jitendra Jauhar on April 17, 2012 at 1:37pm

प्रिय भाई बागी जी,

इस लघुकथा के माध्यम से गुड़िया का सद्‍चरित्र रेखांकित करने के साथ ही आपने हमारे समाज का भी एक चेहरा उजागर करने में सफलता पायी है...! आपका लेखन सार्थ्क है...सराहनीय है! 

समयाभाव में मैं टिप्पणी भले ही नहीं दर्ज कर पाता हूँ, लेकिन आज आपकी इस लघुकथा ने मुझे प्रेरित किया कि समय निकालूँ।

आपको हार्दिक बधाई...!


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on April 17, 2012 at 8:49am

शन्नो दीदी लघु कथा पसंद करने हेतु आभार |

Comment by Shanno Aggarwal on April 17, 2012 at 1:41am

दिल को छू गयी ये कहानी. एक औरत को इस समाज में इज्ज़त से जीने के लिये कैसे झूठ का सहारा लेना पड़ा.

कृपया ध्यान दे...

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