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सबकुछ कह जाने दो ..

है बड़ी बात तो बड़ी बात ही रह जाने दो ..

मेरी बातों को मेरी बातों में बह जाने दो ..
लफ्ज़ कितना भी कहें कहते कहाँ हैं सबकुछ ..फिर भी ..
आज लफ्ज़ - ब- लफ्ज़ मुझे सबकुछ कह जाने दो ..

ज़लज़ला है ,तूफ़ान है या है बवंडर कोई ..
कितनी हलचल है मगर रूह है खोई खोई ..
फिर से कुदरत की कुदरत से ठन जाने दो ..
आज लफ्ज़ - ब- लफ्ज़ मुझे सबकुछ कह जाने दो ..

लडखडाती है जुबां ,क्यूँ नहीं कहने पाती..
नमी आँखों की क्यूँ  स्याही में है घुल जाती ..
चलो यूंही सही ,स्याही अश्कों को बन जाने दो ..
आज लफ्ज़ - ब- लफ्ज़ मुझे सबकुछ कह जाने दो ..

हैं सभी अपने पर कोई भी अपना तो नहीं ..
सच चेहरों पे मगर सच्चा सच में तो नहीं 
हर चेहरे से अब सच को छलक जाने दो ..
आज लफ्ज़ - ब- लफ्ज़ मुझे सबकुछ कह जाने दो ..



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Comment by Lata R.Ojha on March 23, 2012 at 11:32pm

बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय अविनाश बागडे जी 

Comment by Lata R.Ojha on March 23, 2012 at 11:31pm

सराहना के लिए आभार महिमा श्री जी :)

Comment by AVINASH S BAGDE on March 23, 2012 at 7:49pm

लफ्ज़ कितना भी कहें कहते कहाँ हैं सबकुछ ..फिर भी ..

आज लफ्ज़ - ब- लफ्ज़ मुझे सबकुछ कह जाने दो .......

सबकुछ कह gai aapki ye भावपूर्ण रचना लता जी.

Comment by MAHIMA SHREE on March 23, 2012 at 2:51pm
ज़लज़ला है ,तूफ़ान है या है बवंडर कोई ..
कितनी हलचल है मगर रूह है खोई खोई ..
फिर से कुदरत की कुदरत से ठन जाने दो ..
आज लफ्ज़ - ब- लफ्ज़ मुझे सबकुछ कह जाने दो .

नमस्कार
वाह क्या कहने है....हरेक पैरा ....लाजवाब...बधाई लता जी...
Comment by Lata R.Ojha on March 23, 2012 at 2:49pm

आदरणीय संदीप जी मेरी इस अभिव्यक्ति को पसंद करने के लिए धन्यवाद :)

Comment by Lata R.Ojha on March 23, 2012 at 2:47pm

आदरणीय कुशवाहा जी ,आपके सभी कमेंट्स प्राप्त हुए हैं ,बहुत बहुत आभार ..कल बस पोस्ट करके लौग  आउट किया था सो अभी देखे सब कमेंट्स .

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on March 22, 2012 at 8:38pm

हैं सभी अपने पर कोई भी अपना तो नहीं ..

सच चेहरों पे मगर सच्चा सच में तो नहीं 
हर चेहरे से अब सच को छलक जाने दो ..
आज लफ्ज़ - ब- लफ्ज़ मुझे सबकुछ कह जाने दो ..
sundar bhav evam prastuti. aadarniya mahodaya ji. badhai.
Comment by संदीप द्विवेदी 'वाहिद काशीवासी' on March 22, 2012 at 6:49pm

आदरणीया लता जी,

आपकी भावपूर्ण रचना बहुत अच्छी लगी| बधाई!

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on March 22, 2012 at 6:00pm

aadarniya mahoday tisra kament daal raha hoon. badhai . pahle vale lagta hai net ki vajah se nahi aaye honge.

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on March 22, 2012 at 5:22pm

aadarniy mahodayaa sadar abhivadan  kuch bhi na kahte hue sab kah diya. badhai.

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