For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

सरहद पर जाते वक्त

सरहद पर जाते वक्त 

वो  जो नज़र झुका कर कहा तुमने 
प्रिया! लौट कर न आ पाऊं  शायद
फिर से तेरी बांहों में 
जम्भूमि के कर्ज  चुकाने हैं 
नहीं निभा पाउँगा तुम्हारे प्रति अपना फर्ज 
हो सके तो माफ़ कर देना मुझे 
सच कंहूँ तो  तेरी इस शपथ  से  
डबडबाये   जरुर थे मेरे नयन  
पर यकीं कर  साथी 
मेरा माथा गर्व से तन गया था उस वक्त 
कितनी खुश नसीब होती हैं 
वो पत्नियाँ  ,वो प्रेमिकाएं 
जिनके पति ,प्रेमी 
देश-प्रेम में मिट जाते हैं 
 
--आशा  पाण्डेय ओझा 

Views: 736

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by asha pandey ojha on March 9, 2013 at 10:06pm

Priya Vedika kotish dhnywaad aapko

Comment by asha pandey ojha on March 9, 2013 at 10:06pm

Aadrniy कमलकिशोर भागिरथजी अग्रवाल sir hardik aabhar aapka aapki amulya prtikriya ke liye

Comment by वेदिका on March 6, 2013 at 11:48pm

बहुत सजल रचना है, वीरता और वियोग के सम्मिश्रण से ओतप्रोत ...

जम्भूमि के कर्ज  चुकाने हैं 
नहीं निभा पाउँगा तुम्हारे प्रति अपना फर्ज


शुभकामना आदरणीया आशा जी !
सादर वेदिका

Comment by कमलकिशोर भागिरथजी अग्रवाल on March 6, 2013 at 11:12pm

आशाजी नमस्कार! आपकी रचना पढने को मीली ! कीतने सहज भावसे आपने एक सैनिक का प्रेम तथा देशप्रेम दोनो को दर्षाया! यह क़ाबिले तारीफ है ! 

Comment by asha pandey ojha on March 6, 2013 at 5:44pm

Aadrniy  Laxman Prasad Ladiwala ji aapka kotish dhnywaad ukt rachna par aapki bahumulya prtikriya ke liye .. punh saadr aabhar

Comment by asha pandey ojha on March 6, 2013 at 5:43pm

Aadrniya Vijay Nikor ji sir saadr dhnywaad aapka is Rachna ko padh kar apni beshkimtee prtikriya zahir kar mera housla badhane hetu . aabhar

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on March 6, 2013 at 2:59pm

सैनिक जो राष्ट्र की रक्षा में अपना सर्वस्व अर्पित कर देते है, उनकी गृहणिया का त्याग भी किसीतरह कम नहीं है | 

एक और सुंदर रचना के लिए हार्दिक बधाई 

Comment by vijay nikore on March 6, 2013 at 2:22pm

आदरणीया आशा जी:

 

मेरा सौभाग्य है कि आज अचानक आपके बलाग पर मुझको

आपकी २०१२ की यह इतनी अच्छी कविता पढ़ने को मिली।

गर्व है सैनिकों पर, उनके परिवार पर, और आपकी इस कविता पर!

 

सादर,

विजय निकोर

Comment by asha pandey ojha on February 20, 2012 at 7:09pm

@ Neerajji @ Arun Kumar Pandey 'Abhinav' bhiya @Saurabh Pandey ji sir @ Ganesh Jee "Bagi bhiya @AVINASH S BAGDE  ji sir @rajesh kumariji aap sabhi ka hardik dhnywaad meree is rachna par apni bahumulya prtikriya vykt karne ke liye 

Comment by Abhinav Arun on February 17, 2012 at 7:56pm
Hriday ke udgaar Jis sashakt kavy roop me apne ukere hain wah bhaav anupam hai Asha di.ek jevant Zindabaad aur hausle ki rachna.Salaam apko apki lekhni ko.

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Admin posted a discussion

"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185

आदरणीय साहित्य प्रेमियो,जैसाकि आप सभी को ज्ञात ही है, महा-उत्सव आयोजन दरअसल रचनाकारों, विशेषकर…See More
yesterday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैं
"आदरणीय रवि भसीन 'शाहिद ' जी सादर अभिवादन प्रथम तो मैं क्षमाप्रार्थी हूँ देरी से आने की…"
Tuesday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा दशम. . . . . उम्र

दोहा दशम् . . . . उम्रठहरी- ठहरी उम्र अब, करती एक सवाल ।कहाँ गई जब जिंदगी, रहती थी खुशहाल ।।यादों…See More
Monday
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Jaihind Raipuri 's blog post वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैं
"आदरणीय Jaihind Raipuri साहिब, नमस्कार। बढ़िया ग़ज़ल हुई है, बधाई स्वीकार करें। /ये मेरा…"
Friday
आशीष यादव added a discussion to the group धार्मिक साहित्य
Thumbnail

चल मन अब गोकुल के धाम

चल मन अब गोकुल के धाम अद्भुत मनहर बाल रूप में मिल जाएंगे श्याम कि चल मन अब……………………….कटि करधनी शीश…See More
Apr 3
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदरणीय अशोक भाईजी धन्यवाद ... मेरा प्रयास  सफल हुआ।"
Mar 31
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"वाह वाह वाह !!! बहुत दिनों बाद ऐसी लाजवाब प्रतिक्रिया पढने में आई है। कांउटर अटैक ॥ हजारों धन्यवाद…"
Mar 31
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"  आदरणीय शेख शाहज़ाद उस्मानी जी सादर, सरकारी शालाओं की गलत परम्परा की ओर ध्यान आकृष्ट कराती…"
Mar 31
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"सार्थक है आपका सुझाव "
Mar 31
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदाब।‌ रचना पटल पर उपस्थिति और समीक्षाओं हेतु हार्दिक धन्यवाद आदरणीया प्रतिभा पाण्डेय जी। मेरी…"
Mar 31
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"हार्दिक धन्यवाद आदरणीया प्रतिभाजी ।  इसमें कुछ कमी हो सकती है लेकिन इस प्रकार के आयोजन शहरों…"
Mar 31
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव साहब सादर, बिना सोचे बोलने के परिणाम पर सुन्दर और संतुलित लघुकथा…"
Mar 31

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service