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धन्य हो प्रभु चिदंबरम ,

धन्य हो प्रभु चिदंबरम ,
धन्य है आपकी सोच ,
जल रहा सारा भारत ,
आपका यही हैं खोज ,
कश्मीर से कन्याकुमारी तक ,
लोग जर्जर करते आज ,
आपको केवल दिख रहा हैं ,
भगवा आतंकबाद ,
धन्य हो प्रभु चिदंबरम ,
धन्य है आपकी सोच ,
आपको कुछ नहीं देखना चाहते ,
या आपको कुछ नहीं हैं याद,
अफजल गुरु मेहमान बना हैं ,
कसाब मुफ्त का खा रहा हैं
कानून बनावो सीधे फासी ,
चाहे कोई हो आतंकबादी ,
आप हो हमारे गृहमंत्री ,
लावो खुद में ओज ,
धन्य हो प्रभु चिदंबरम ,
धन्य है आपकी सोच ,

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Comment

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सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Rana Pratap Singh on August 29, 2010 at 12:20am
एडमिन जी इस रचना की एक प्रति शीघ्रातिशीघ्र चिदंबरम जी को नज्र की जाये|

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on August 26, 2010 at 9:40pm
चिदंबरम के सोच के लिये --- मुदो आँख कही कछु नाही .
और आप के लिये ---- वाह उस्ताद वाह

कृपया ध्यान दे...

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