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Rajeev Kumar Pandey's Blog – April 2011 Archive (5)

कल का आज कैसा होगा ?

 

कल का आज कैसा होगा ,

किसी के  सपनो के ताजमहल नही ,

खंडहर जैसा होगा ,

दीवारें खड़ी बेजान सी ,

जाने पहचाने अनजान सी,

उठने से पहले ,

दबने वाले तूफान सी ,

खड़ी होगी अपने जर्जर नीव पर ,

अपने सत्य को मिथ्या बताते ,

जिन्हें देख कर उठेगा प्रश्न ,

कल का आज कैसा होगा,

इस खँडहर नही,

किसी के…

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Added by Rajeev Kumar Pandey on April 13, 2011 at 12:30pm — 2 Comments

बदल गया है आदमी





आज लगता है शायद बदल गया है आदमी ,

अपनी लगाई आग में ही जल गया है आदमी,



कल जिस चीज  की ओर नजर  भी नही फेरता था,

आज  उसी के लिए  ही क्यूँ मचल गया है आदमी  ,



कल तक था जो पत्थरों  की तरह  अडिग ,…

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Added by Rajeev Kumar Pandey on April 13, 2011 at 12:00pm — 2 Comments

देख गमों को मेरे वे मुस्कुराते बहुत हैं,





उनके गमले में खुशबू हैं बिखरे हुए ,

मेरे दामन हैं  काँटों से निखरे हुए ,

वो  मखमल की सेजों पे भी रोते हैं,

चेहरे धूल में हमारे रहते हैं निखरे हुए,



देख गमों को मेरे वे मुस्कुराते बहुत हैं,…

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Added by Rajeev Kumar Pandey on April 12, 2011 at 11:30pm — 1 Comment

मै नारी हूँ

मै नारी हूँ

अक्सर मै इसी सोच में खो जाती हूँ

क्या मुझे वो अधिकार मिला है ?

मै जिसकी अधिकारी हूँ ?

मै नारी हूँ



मनु कि  अर्धांगिनी मै

विष्णु- शिव कि संगिनी मै

मै अक्सर सोचा करती हूँ…

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Added by Rajeev Kumar Pandey on April 12, 2011 at 9:30pm — 6 Comments

मै मरघट में जब जाता हूँ .

 

मै   मरघट  में  जब  जाता  हूँ  ,

 मै  मर-घट  में  मर  जाता  हूँ  ,

 जब  मर  और  घट  न  घट  पाए..

  तो  खुद  ही  मै  घट  जाता  हूँ .//

 

मै  मरघट   को  समझाता  हूँ ,

 कि  …

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Added by Rajeev Kumar Pandey on April 7, 2011 at 10:39am — 1 Comment

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