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savita agarwal
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Female
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bikaner rajasthan
Native Place
kanpur
Profession
artist
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जो अर्थो को पाते है ,वो शब्द बन बिखर जाते है , खुशबु से ज्ञान की ,जीवन बगिया महकाते है |...

Savita agarwal's Blog

मीठी सी एक मनुहार................

पारदर्शी शीशो पर

लगा दी काली चादर

अब बाहर वाले

नही देख सकते

 भीतर का हाल

ठीक उसी तरह

जैसे तुमने

अपने चेहरे की

अतुलनीय मुस्कराहट से

बंद कर दिए

भीतर के सभी किवाड़

जो आया जितना आया

सब डालती जा रही हो

अब डर सा

लग रहा हैं मुझे

खिडकियों की

काली  चादर

कुरच रही हैं

हवा बाहर  की

ओर मुझे

दिखाई दे रही हैं

एक रौशनी सी

जो सब बहा ले जाएगी

अबकी जो ये कमरा

खाली  हो जाये तो

बंद मत…

Continue

Posted on October 18, 2013 at 9:30pm — 13 Comments

विचारो का बीज.............

हाथ में कुछ बीज

यूँ ही ले के कागजो

पे बोने आ गयी हूँ

विचारो के बीज

सबको कहाँ मिलते हैं

मुझे भी बस एक ही मिला

एक बाग़ लगाना है

इसलिए मुट्ठी

कस कर बंद हैं

इस बीज को वृक्ष

वृक्ष से फिर बीज

इसी तरह

तो लगेगा बाग़

माली ने बताया था

माली वो जो

सबके भीतर हैं

मुझे मिला था

एक रोज जब

उसी ने दिया था

 ये एक बीज

''विचारो का बीज ''

"मौलिक व…

Continue

Posted on October 16, 2013 at 8:30pm — 15 Comments

चोका..................

चाँद जो आया
रात के आँगन में
तारे चमके
चांदनी की गोद में
ठंडी सी हवा
मन को लहराए
ख्वाबो  के साये
नींदों को हैं जगाये
सोच रही हूँ
ख़ामोशी इतनी क्यों
मीठी सी लागे
जो  गीत धरा गाये
रात गुदगुदाए .........सविता अगरवाल 

Posted on October 8, 2013 at 2:21pm — 9 Comments

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