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Mayank Kumar Dwivedi
  • Male
  • Mirzapur uttar pradesh
  • India
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  • गिरिराज भंडारी
 

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Mayank Kumar Dwivedi updated their profile
May 8, 2025
Mayank Kumar Dwivedi commented on Mayank Kumar Dwivedi's blog post ग़ज़ल
"सादर प्रणाम आप सभी सम्मानित श्रेष्ठ मनीषियों को 🙏 धन्यवाद sir जी मै कोशिश करुँगा आगे से ध्यान रखूँ 🙏अभी मेरा यहाँ पहला प्रयास है 🙏"
May 4, 2025
अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी commented on Mayank Kumar Dwivedi's blog post ग़ज़ल
""रोज़ कहता हूँ जिसे मान लूँ मुर्दा कैसे" "
May 2, 2025
अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी commented on Mayank Kumar Dwivedi's blog post ग़ज़ल
"जनाब मयंक जी ग़ज़ल का अच्छा प्रयास हुआ है बधाई स्वीकार करें, गुणीजनों की बातों का संज्ञान लीजियेगा। सोचिये आप भी और हम भी कि होगा कैसे हर किसी के लिए माहौल ये प्यारा कैसे लोग उलझन में मुझे देखके ख़ुश होते हैं और ख़ुश हो के ये कहते हैं…"
May 2, 2025

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी commented on Mayank Kumar Dwivedi's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय मयंक भाई ग़ज़ल का प्रयास बहुत अच्छा हुआ है , गुणी जन आवश्यक सलाह दे चुके है , ख़याल करिएगा "
Apr 30, 2025

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Mayank Kumar Dwivedi's blog post ग़ज़ल
"गजलों खो लेकर एक बात जो कम ही चर्चा में आअती है, वह है उसके मिसरों का गद्यानुरूप होना. अर्थात, मिसरे किसी गद्य वाक्य की तरह हों, लेकिन पूरी बहर में हों. इसी आशय को आदरणीय नीलेश भाई और आदरणीय रवि भाई ने अपने ढंग से कहा है.  आदरणीय मयंक जी, आप…"
Apr 30, 2025
Mayank Kumar Dwivedi posted a blog post

ग़ज़ल

2122 1122 1122 22आप भी सोचिये और हम भी कि होगा कैसे,,हर किसी के लिए माहौल ये उम्दा कैसे।। क्या बताएं तुम्हें होता है तमाशा कैसे,,,वास्ते इसके लिए होता दिखावा कैसे।। लोग उलझन में मुझे देखके होते ख़ुश हैं,,,,कुछ तो इस सोच में रहते हैं रहेगा कैसे मैं भी कामिल हूँ यहाँ और हो तुम भी कामिल,कोई आमिल ही नहीं तो मैं बताता कैसे हार जाता मैं उसे प्यार से कहता तू अगर,,,तू लगा लड़ने मेरे यार तो हटता कैसे।। ख़्वाब मे आज भी आता है उसी का चेहरा,,फिर भला और किसी चेहरे को तकता कैसे।। वो यहाँ है नहीं कोई न पता है…See More
Apr 30, 2025
Nilesh Shevgaonkar commented on Mayank Kumar Dwivedi's blog post ग़ज़ल
"आ. मयंक जी,आप जैसे युवाओं को ग़ज़ल कहने का प्रयास करते देख कर बहुत अच्छा लगता है.आप को अभी और समय देना चाहिए और प्रयास करना चाहिए कि कैसे परंपरागत शाइरी का लोच उत्पन्न हो सके..हर किसी के लिए माहौल हो अच्छा कैसे वास्ते इसके लिए होता दिखावा कैसे...…"
Apr 29, 2025
Mayank Kumar Dwivedi replied to Saurabh Pandey's discussion पटल पर सदस्य-विशेष का भाषायी एवं पारस्परिक व्यवहार चिंतनीय
"सादर प्रणाम सर जी 🙏 मैं मयंक कुमार द्विवेदी इस मंच पर बहुत पहले से जुड़ा हूँ और इस मंच से जुड़ने के लिए आदरणीय समर कबीर दादा ने ही मुझे जानकारी मुहैया कराई थी मैं यहाँ ग़ज़ल के मूल पहलुओं को पढ़ता और समझता हूँ बहुत कम ही लिखता हूँ विगत इस आयोजन में कुछ…"
Apr 29, 2025
Ravi Shukla commented on Mayank Kumar Dwivedi's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय मयंक जी ग़ज़ल की पेशकश के लिये मुबारकबाद पेश है ।  जानकारी के लिये बता दूँ कि ग़ज़ल से पहले उसके अरकान लिख दें तो पढ़ने वालों को आसानी रहती है और पटल का भी अनरोध यही है । शेर बहर के मुताबिक है आपका प्रयास भी अच्छा है अशआर में रंगे …"
Apr 29, 2025
Mayank Kumar Dwivedi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-178
"सादर प्रणाम sir जी 🙏धन्यवाद sir जी मंच पर पहली बार शामिल हुआ हूँ sir जी मैं कोशिश करुँगा और अच्छा कर सकूँ 🙏"
Apr 26, 2025
Mayank Kumar Dwivedi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-178
"सादर नमन आदरणीया जी धन्यवाद आपका मैं पुनः प्रयास करता हूँ 🙏"
Apr 26, 2025
Mayank Kumar Dwivedi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-178
"बेहतरीन सृजन हुआ है पितातुल्य 🙏अद्वितीय सृजन 🙏"
Apr 26, 2025
Mayank Kumar Dwivedi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-178
"बेहतरीन सृजन हुआ है आदरणीय जी 🙏"
Apr 26, 2025
Mayank Kumar Dwivedi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-178
"सादर प्रणाम पितातुल्य 🙏धन्यवाद sir जी आपका 🙏"
Apr 26, 2025
Mayank Kumar Dwivedi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-178
"अनुपम सृजन हुआ है sir जी 🙏"
Apr 26, 2025

Profile Information

Gender
Male
City State
Mirzapur
Native Place
Ramaipatti
Profession
Businessman
About me
Writer

Mayank Kumar Dwivedi's Blog

ग़ज़ल

2122 1122 1122 22

आप भी सोचिये और हम भी कि होगा कैसे,,

हर किसी के लिए माहौल ये उम्दा कैसे।।

 

क्या बताएं तुम्हें होता है तमाशा कैसे,,,

वास्ते इसके लिए होता दिखावा कैसे।।

 

लोग उलझन में मुझे देखके होते ख़ुश हैं,,,,

कुछ तो इस सोच में रहते हैं रहेगा कैसे

 

मैं भी कामिल हूँ यहाँ और हो तुम भी कामिल,

कोई आमिल ही नहीं तो मैं…

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Posted on April 20, 2025 at 1:30pm — 7 Comments

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At 11:07am on April 6, 2025, Mayank Kumar Dwivedi said…
Ok
At 10:29am on April 9, 2024, Erica said…

I need to have a word privately, please get back to me on ( mrs.ericaw1@gmail.com) Thanks.

 
 
 

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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post आदमी क्या आदमी को जानता है -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई रवि जी सादर अभिवादन। गजल पर आपकी उपस्थिति का संज्ञान देर से लेने के लिए क्षमा चाहता.हूँ।…"
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