For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

आदरणीय काव्य-रसिको !

सादर अभिवादन !!

 

’चित्र से काव्य तक छन्दोत्सव का यह एक सौ इक्कीसवाँ आयोजन है.   

 

इस बार का छंद है - गीतिका छंद  

आयोजन हेतु निर्धारित तिथियाँ  

22 मई 2021 दिन शनिवार से 23 मई 2021 दिन रविवार तक

हम आयोजन के अंतर्गत शास्त्रीय छन्दों के शुद्ध रूप तथा इनपर आधारित गीत तथा नवगीत जैसे प्रयोगों को भी मान दे रहे हैं. छन्दों को आधार बनाते हुए प्रदत्त चित्र पर आधारित छन्द-रचना तो करनी ही है, दिये गये चित्र को आधार बनाते हुए छंद आधारित नवगीत या गीत या अन्य गेय (मात्रिक) रचनायें भी प्रस्तुत की जा सकती हैं.

केवल मौलिक एवं अप्रकाशित रचनाएँ ही स्वीकार की जाएँगीं. 

गीतिका छंद के मूलभूत नियमों से परिचित होने के लिए यहाँ क्लिक करें

चित्र अंतर्जाल से

जैसा कि विदित है, कईएक छंद के विधानों की मूलभूत जानकारियाँ इसी पटल के  भारतीय छन्द विधान समूह में मिल सकती है.

********************************************************

आयोजन सम्बन्धी नोट 

फिलहाल Reply Box बंद रहेगा जो

22 मई 2021 दिन शनिवार से 23 मई 2021 दिन रविवार तक, यानी दो दिनों के लिए, रचना-प्रस्तुति तथा टिप्पणियों के लिए खुला रहेगा.

 

अति आवश्यक सूचना :

  1. रचना केवल स्वयं के प्रोफाइल से ही पोस्ट करें, अन्य सदस्य की रचना किसी और सदस्य द्वारा पोस्ट नहीं की जाएगी.
  2. नियमों के विरुद्ध, विषय से भटकी हुई तथा अस्तरीय प्रस्तुति को बिना कोई कारण बताये तथा बिना कोई पूर्व सूचना दिए हटाया जा सकता है. यह अधिकार प्रबंधन-समिति के सदस्यों के पास सुरक्षित रहेगा, जिस पर कोई बहस नहीं की जाएगी.
  3. सदस्यगण संशोधन हेतु अनुरोध  करेंआयोजन की रचनाओं के संकलन के प्रकाशन के पोस्ट पर प्राप्त सुझावों के अनुसार संशोधन किया जायेगा.
  4. अपने पोस्ट या अपनी टिप्पणी को सदस्य स्वयं ही किसी हालत में डिलिट न करें। 
  5. आयोजनों के वातावरण को टिप्पणियों के माध्यम से समरस बनाये रखना उचित है. लेकिन बातचीत में असंयमित तथ्य न आ पायें इसके प्रति संवेदनशीलता आपेक्षित है.
  6. इस तथ्य पर ध्यान रहे कि स्माइली आदि का असंयमित अथवा अव्यावहारिक प्रयोग तथा बिना अर्थ के पोस्ट आयोजन के स्तर को हल्का करते हैं.
  7. रचनाओं पर टिप्पणियाँ यथासंभव देवनागरी फाण्ट में ही करें. अनावश्यक रूप से रोमन फाण्ट का उपयोग  करें. रोमन फ़ॉण्ट में टिप्पणियाँ करना एक ऐसा रास्ता है जो अन्य कोई उपाय न रहने पर ही अपनाया जाय.
  8. रचनाओं को लेफ़्ट अलाइंड रखते हुए नॉन-बोल्ड टेक्स्ट में ही पोस्ट करें. अन्यथा आगे संकलन के क्रम में संग्रहकर्ता को बहुत ही दिक्कतों का सामना करना पड़ता है.

छंदोत्सव के सम्बन्ध मे किसी तरह की जानकारी हेतु नीचे दिये लिंक पर पूछताछ की जा सकती है ...


"ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" के सम्बन्ध मे पूछताछ

"ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" के पिछ्ले अंकों को यहाँ पढ़ें ...

विशेष यदि आप अभी तक  www.openbooksonline.com  परिवार से नहीं जुड़ सके है तो यहाँ क्लिक कर प्रथम बार sign up कर लें.

 

मंच संचालक
सौरभ पाण्डेय
(सदस्य प्रबंधन समूह)
ओपन बुक्स ऑनलाइन डॉट कॉम

Views: 326

Replies are closed for this discussion.

Replies to This Discussion

(चित्राधारित गीतिका)
बैठ जाएं आज रिक्सा में चलो दोनों वहाँ।
है गया स्वामी कहीं रिक्सा खड़ा ख़ाली यहाँ।
लाल प्यारी सीट देखो मोहती मेरा जिया।
हाथ थामे जा चढ़े, बैठे, हुआ राजी हिया।।

स्वर्ग में भी क्या मिलेगी मौज ऐसी पा रहे।
मुस्कुराते चेहरे सन्देश ये फैला रहे।
है नहीं पैसा ख़ुशी का उत्स सारे जान लो।
है कहीं पैठी तुम्हारे ही दिलों में मान लो।।
गंगा धर शर्मा 'हिन्दुस्तान'
अजमेर (राज.)
(मौलिक एवं अप्रकाशित)

आ. भाई गंगाधर जी, चित्र को परिभाषित करती सुन्दर रचना हुई है । हार्दिक बधाई।

एक सूखा कौर खाकर नित गरीबी में जिये।
पर न खोया बालपन को छोड़ आये हाशिये।।
तात का रिक्सा सिंहासन वो बनाकर हँस दिये।
खोजना सुख काम इनका ये समय के गड़रिये।।
***
है हसी मुख पर  समेटे  खूब  दो  भाई बहन।
चाहते क्या बोलना मन में करो इसका मनन।*।
हो गरीबी रोग संकट मत करो दुख को वहन।
है जलाती सुख सभी सिर्फ चिन्ता की अगन।।
***
भाव मन में है नहीं भय का तनिक भी देखिए।
क्या करोना रोग है इन को न मतलब जानिए।।
कह रहे जैसे तजो दुख मत खुशी को रोकिए।
सत्य क्या इससे इतर है आप मन में सोचिए।।
***
कह रहे कुर्सी  मिली  है  राज अपना हो गया।
अब करेंगे देश हित में काम हम भी इक नया।।
सिर्फ सेवा भाव होगा  साथ मन में बस दया।
हो सुरक्षित जी सके यह देश जीवन निर्भया।।
***
मौलिक/अप्रकाशित
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

चित्र  आधारित  गीतिका छ॔द :

राजा-रानी हो गये हैं बैठ वो रिक्शा अहा !

हँस रहे उन्मुक्त होकर बचपना है वो अहा  !!

हास में आनन्द  उनके  मस्त  दिखते  चेहरे  !

पा गये अत्यंत खुशियाँ  दिख रही जो चेहरे !!

मुस्कराते  रात-दिन हँसते  सदा बचपन रहे !

फिक्र भी होती नहीं बचपन नशे में हम रहे !!

फाँदते  ग॔गा  किनारे कबड्डी हम खेलते !

खूब खाते खीर-पूरी द॔ड हम तो पेलते  !!

शाम  मैदानों  कभी वर्षा सुबह  बचपन अहा !

हम घरौंदे थे बनाते रेत पर  बचपन अहा  !!

लाज आती  थी नहीं जब खोल दिल हँसते रहे !

सामने खतरों कभी  लड़ते मजा करते रहे  !!

सावनों बरसात में हम दौड़ते होते  सड़क  !

खेलते खोखो नगर बचपन रहे हम बेधड़क !!

नाव कागज की हमारी तैरती  नालों सदा!

हम नहाते  नाचते नंगे बदन गंगा सदा  !!

थक गयी परवाज जब जा हम चढ़े पेड़ों अहा !

खूब  खाते आम  यारो तोड़  बागों  में  अहा  !!

जब पकड़ता  बागवाँ  फिर पीटता वो  थोक  में !

दौड़ते  हम भी बहुत पर मारता  माली  हमें !!

हम सिकन्दर गाँव के लाठी  हमारे  हाथ में  !

थी शरारत  यार जिगरी दोस्ती  भारी  हमें  !!

क्या ठिकाना था खुशी का खूब दौलत जो रही !

फूल सा बचपन गया जाती हमारी  लय रही !!

मौलिक एवम्  अप्रकाशित 

अत्यंत हृदयविदारक सूचना के कारण इस आयोजन को तत्काल प्रभाव से स्थगित किया जाता है .. 

सादर 

RSS

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Rozina Dighe replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-133
"आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर' जी नमस्कार! बहुत ख़ूब ग़ज़ल! 5 शेर ख़ास पसंद आया। धन्यवाद"
6 minutes ago
Rozina Dighe replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-133
"जी आदरणीय ध्यान रखूंगी इस बात का। धन्यवाद"
24 minutes ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-133
"जनाब सालिक गणवीर जी आदाब, तरही मिसरे पर ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है, बधाई स्वीकार करें । 'हाथ में…"
29 minutes ago
Rozina Dighe replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-133
"नमस्कार अलग ही अंदाज की ग़ज़ल। गिरह का शेर भी पोस्ट कर दे तो नियमों का भी पालन हो जाएगा। धन्यवाद"
33 minutes ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-133
"मुहतरमा रोज़ीना जी, ये ओबीओ की परिपाटी नहीं है, यहाँ पहले आदरणीय,मुहतरम, जनाब कहकर संबोधित करते हैं,…"
40 minutes ago
Sanjay Shukla replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-133
"हाथ में मोज़ा पहनते पाँव में दस्ताना हम आशिक़ी में कर रहे हैं हरकतें बचकाना हम /1 सायकिल पर लादते…"
43 minutes ago
Rozina Dighe replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-133
"नमस्कार 5 ओर गिरह का शेर बहुत खूबसूरत! 2 में शायद ताक़बूल-ए-रदीफ़ हो रहा है।"
47 minutes ago
Rozina Dighe replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-133
"2122 2122 2122 212 बिन पिये ही हो रहे हैं लाग्ज़िशें-मस्ताना हम साक़िया पुर-कैफ़ नज़रों के हाँ हैं…"
50 minutes ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-133
"मुहतरमा ऋचा यादव जी आदाब, तरही मिसरे पर ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है, बधाई स्वीकार करें । 'और क्या…"
1 hour ago
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-133
"आदरणीय चेतन प्रकाश जी बहुत ख़ूब ग़ज़ल हुई बधाई।स्वीकार करें।"
1 hour ago
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-133
"आदरणीय सालिक गणवीर जी बेहतरीन ग़ज़ल हुई। बधाई स्वीकार करें।"
1 hour ago
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-133
"2122  2122   2122  212 1 कल तुम्हारी बज़्म में भूलकर शर्माना हम पी रहे थे जाम आँखों…"
1 hour ago

© 2021   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service