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बबुआ हो तनी घूम जाईता ,
फोनवा पे का हम सुनाई ,
खपरा फूटल छान के बाटे ,
सोच कईसे हम बनवाई ,
चार साल से तू ना आईला ,
बहुआ के लेके जबे तू गईला ,
पोता के मुह देखे खातिर ,
हमारो जिया छाछनाइल ,
बबुआ हो तनी घूम जाईता ,
खेती बाड़ी से कुछ न मिले ,
बड़ी मुस्किल से दिन कटत बा ,
बबुआ हम इ बता दिही ,
हर साल खेत कुछ घटत बा ,
ये के बचावे के चाह ता ,
पईसा कुछ भेजवइता ,
बबुआ हो तनी घूम जाईता ,
खुस रहा तू खुस हम बानी ,
तनिक मति घबराइह ,
हमरा पोता के तुहू ,
बाबु खूब पढ़ाइहा ,
हमरा उमर के जब होखबा ,
ता तनिक ना घबराइहा ,
जहिया छोड़ के उ जाई ,
तब माई के समझ जइबा ,
बबुआ हो तनी घूम जाईता ,

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Replies to This Discussion

गुरूजी सबसे पहले नमस्कार !
राउर कविता पढ़ के ता मन समाज के इ मुख्या समस्या के ओर आकृष्ट हो गइल हा
गुरूजी राउर इ कविता लगत बा जैसे कोई बुढ महतारी अपना बेटा के याद में कह रहल बिया ,एकरा के हम कविता न मनाब बल्कि आज के समाज के इ कड़वा सच बा .
जवान बाप माई पोश पाल के इतना पढ़ा लिखा बचवा के कुछ करे के काबिल बनावत बा ओह माई बाप के क़ुरबानी और मेहनत जरा) सा भी मोल बचवा लोग के आँख में नइखे ,शहर में ए सी के निचे बैठ गैयिला के बाद बचवा लोग एह बात के भुला जात बडान जा की हम ओही छप्पर के निचे से आज एह मुकाम तक आइल बनी ,जवन छप्पर(खपरा) के छावे के बात माई एह कविता में कह रहल बिया

रत्नेश रमण पाठक .
गुरु जी आज बहुत दिन बाद रउरा कलम से बहुत ही शानदार और ह्रदय स्पर्शी रचना निकलल बा, वास्तव में एगो बेहतरीन रचना, बहुत बहुत बधाई एह सारगर्भित रचना पर |
dhanyabad ganesh ji aur ratnesh ji rauaa login ke
रवि जी, बहुत मर्मस्पर्शी रचना बा । लइका के पैदा भइला के बाद ओकर लालन-पालन कर के बऽड़ करऽ । बऽड़ भइला पर जब ऊहे लइका घर से बाहर चऽल जाता तऽ अपना जिर्दगी के चकरघिन्नी में अइसन घूमे लागत बा कि माई-बाप के याद करे के फुरसते नइखे मिलत । एने माई के दिल तऽ लइके में अझुराइल रहेला । आजकल के ईहे सचाई बा - एगो कड़ुवा सचाई । आँख में लोर भऽर गइल पढ़ के । बहुत बढ़िया ।
हमरा पोता के तुहू ,
बाबु खूब पढ़ाइहा ,
हमरा उमर के जब होखबा ,
ता तनिक ना घबराइहा ,
जहिया छोड़ के उ जाई ,
तब माई के समझ जइबा ,
बबुआ हो तनी घूम जाईता ,
बड़ नीमन अउरी मन के पोरे -पोर छुवे वाला रचना बा इ. जय हो गुरूजी.
Parnaam guru ji. Ka marmasparshi rachna kaile baani. Bda sughar laagal.
गुरु जी ,
प्रणाम बहुत ही बेहतरीन अभिव्यक्ति के साथ आपने यह भोजपुरी कविता लिखी है , इस कविता का जवाब नही है | इस कविता के भाव तथा विषय महत्वपूर्ण है , धन्यवाद |
ye ijajat afjai khatir rauaa login ke bahut bahut dhanyabad

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