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राकेश
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Gender
Male
City State
वड़ोदरा
Native Place
पटना
Profession
Manager

राकेश's Blog

तेरी याद में

रात के तीसरे पहर में

खिड़की पर यादें लिए बैठा हूँ

बारिश की बुँदे

तेरी आँसुओ से लगते है

दिल में कई अरमान से जगते है

गलियों में भागते हुए

एक झलक देखी है ख्वाबों की

कई रतजगा किये, कई दिन बीते खाली सा

कड़ी धूप में नंगे पैर जलाये है

मेरे संग आज भी तेरे साये है

एक रंग चुना है आँखों ने

एक गंध बसी है साँसों में

अज़ब सा नशा है

नज़रे भागती है हरदम

ज़ुल्फों पर चमकती है शबनम

पानी की टंकी पर बैठ…

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Posted on October 30, 2015 at 2:00pm

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At 3:32pm on October 28, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

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 ग़ज़ल की बातें 

 

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At 6:03pm on October 27, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…
ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में आपका स्वागत है।
 
 
 

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