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Hiren Arvind Joshi's Discussions (13)

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"हौंसला अफ़ज़ाई के लिए शुक्रिया"

Hiren Arvind Joshi replied Jan 29 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-139

265 Jan 29
Reply by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी

"हौंसला अफ़ज़ाई के लिए शुक्रिया। कोशिश रहेगी आप सभी के सहयोग से कुछ सीख लूँ"

Hiren Arvind Joshi replied Jan 28 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-139

265 Jan 29
Reply by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी

"प्रोत्साहित करने के लिए धन्यवाद"

Hiren Arvind Joshi replied Jan 28 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-139

265 Jan 29
Reply by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी

"आदरणीय, आपके सुझाव हेतु धन्यवाद। जिआ, जिया हेतु ही प्रयोग किया है।  जीगर या मन कह सक…"

Hiren Arvind Joshi replied Jan 28 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-139

265 Jan 29
Reply by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी

"आदरणीय धन्यवाद"

Hiren Arvind Joshi replied Jan 28 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-139

265 Jan 29
Reply by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी

"आपकी प्रतिक्रिया और सुझाव हेतु धन्यवाद। आपके सुझाव के अनुसार लेखन का अवश्य जरूर करूँ…"

Hiren Arvind Joshi replied Jan 28 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-139

265 Jan 29
Reply by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी

"आपकी प्रतिक्रिया और सुझाव हेतु धन्यवाद"

Hiren Arvind Joshi replied Jan 28 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-139

265 Jan 29
Reply by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी

"अच्छा प्रयास"

Hiren Arvind Joshi replied Jan 28 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-139

265 Jan 29
Reply by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी

"जब लगी ठोकर जिआ पर हम सियाने हो गए ज़ख़्मे-फुर्क़त के हमारे अब ख़ज़ाने हो गए अश्क छलके ह…"

Hiren Arvind Joshi replied Jan 28 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-139

265 Jan 29
Reply by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी

"बेहतरीन ग़ज़ल"

Hiren Arvind Joshi replied Jan 28 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-139

265 Jan 29
Reply by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी

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"आ. भाई अमीरुद्दीन जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति, स्नेह व सुझाव के लिए आभार। "
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post एक अनबुझ प्यास लेकर जी रहे हैं -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई गुमनाम जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति व स्नेह के लिए आभार।"
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post एक अनबुझ प्यास लेकर जी रहे हैं -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई अमीरूद्दीन जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति व स्नेह के लिए आभार। अनबुझ का अर्थ यहाँ कभी न…"
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post एक अनबुझ प्यास लेकर जी रहे हैं -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
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