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औरत एक औरत भी है

औरत कभी मां है

कभी बहन, कभी बेटी

तो कभी पत्नी या प्रेयसी

इन सबसे अलग

औरत एक औरत भी है

 

अपने आप में मरती है

उफ! तक भी नहीं करती है और

पुरूष के अहं मो टूटने से

बचाए रखती है

 

वह जानती है

पुरूष एक बार टूट जाएगा तो

दुबारा जुड़ नहीं पाएगा

जबकि औरत?

 

औरत ने पाई है मिट्टी की प्रकृति

टूटते ही अपने आंसुओं से

गुथेगी खुद को, और जुड़ जाएगी

नई परिस्थितियों से।

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Comment by satyendr sengar on May 14, 2011 at 9:13pm

औरत ने पाई है मिट्टी की प्रकृति

टूटते ही अपने आंसुओं से

गुथेगी खुद को, और जुड़ जाएगी

नई परिस्थितियों से।    ....Wah kya baat hai....shaandar panktiyon ke liye badhaaaeee

 

Comment by Abhinav Arun on May 10, 2011 at 3:23pm
bahut gambheer aur sachchee baat kahee aapne is kavita men -
औरत ने पाई है मिट्टी की प्रकृति

टूटते ही अपने आंसुओं से

गुथेगी खुद को, और जुड़ जाएगी

नई परिस्थितियों से।

badhaaee ho |

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