For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

"इक ऐसा भी घर बनवाना"

इक ऐसा भी घर बनवाना!
जिसमे रह ले एक ज़माना !!

खुद से खुद की बातें करना !
जब खुद के ही हिस्से आना !!

वो मरा है तू भी मरेगा !
लगा रहेगा आना जाना !!

कुछ ऐसा भी कर ले पगले !
जो बन जाए एक फ़साना !!

खुद से ही भागेगा कब तक !!
खुद से चलता नहीं बहाना !!

भूल गया हो गर वो मुझको !
उसको मेरी याद दिलाना !!
***************************

राम शिरोमणि पाठक"दीपक"
मौलिक/अप्रकाशित

Views: 383

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by ram shiromani pathak on August 15, 2014 at 12:15am

 बहुत बहुत आभार आदरणीय आशीष नैथानी 'सलिल'  जी ,,,,,,,,,,   सादर

Comment by ram shiromani pathak on August 15, 2014 at 12:14am

 बहुत बहुत आभार आदरणीया सविता  जी ,,,,,,,,,,   सादर

Comment by ram shiromani pathak on August 15, 2014 at 12:13am

उत्साह वर्धन अनुमोदन व् अमूल्य सुझाव हेतु बहुत बहुत आभार आदरणीय सौरभ पाण्डेय जी ,,,,,,,,,,   सादर प्रणाम

Comment by आशीष नैथानी 'सलिल' on August 14, 2014 at 11:15pm

खुद से ही भागेगा कब तक !!
खुद से चलता नहीं बहाना !! बहुत सुन्दर ! वाह !!

Comment by savitamishra on August 14, 2014 at 8:36pm

अति सुन्दर


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on August 14, 2014 at 7:58pm

इक ऐसा भी घर बनवाना!
जिसमे रह ले एक ज़माना !! ...  मन को संतुष्ट करता हुआ मतला हुआ है, वाह !

खुद से खुद की बातें करना !
जब खुद के ही हिस्से आना !!..... इस अत्यंत प्रभावी तथा चकित करते शेर के लिए मैं बार-बार दाद कह रहा हूँ.

वो मरा है तू भी मरेगा !
लगा रहेगा आना जाना !!... ..  . कथ्य सामान्य है. शेर का उला देख लीजियेगा. कुछ और प्रवहमान होना चाहता है.

कुछ ऐसा भी कर ले पगले !
जो बन जाए एक फ़साना !!..........हम्म.. . मगर सिर्फ़ ’फ़साना’ बनने के पीछे मत पड़ना.. :-))

खुद से ही भागेगा कब तक !!
खुद से चलता नहीं बहाना !!........ बहुत खूब !

भूल गया हो गर वो मुझको !
उसको मेरी याद दिलाना !!.............. सही बात ..

भाई रामशिरोमणी, इस बह्र की खासियत ही है कि इसका प्रवाह सरस होता है. यदि वाचन में कहीं अटकाव हुआ तो प्रभाव कम पड़ता है. उस हिसाब से कुछेक मिसरे तनिक और प्रयास मांगते हैं. लेकिन यह अवश्य है कि आपकी मेहनत आश्वस्त करती है.
दाद कुबूल करें.
 

Comment by ram shiromani pathak on August 13, 2014 at 5:44pm

हार्दिक आभार आदरणीया मीना दी...............   सादर 

Comment by Meena Pathak on August 13, 2014 at 2:36pm

अति सुन्दर 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . . संयोग शृंगार

दोहा पंचक. . . .संयोग शृंगारअभिसारों के वेग में, बंध हुए निर्बंध । मौन सभी खंडित हुए, शेष रही…See More
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/१२२१/२१२ ****** घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये उघड़े  शरीर  आप  ही  सम्मान  हो गये।१। *…See More
Saturday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
Friday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"क्षमा कीजियेगा 'मुसाफ़िर' जी "
Thursday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला आपकी…"
Thursday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। सुंदर गजल हुई है। भाई रवि जी की सलाह से यह और निखर गयी है । हार्दिक…"
Thursday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
Wednesday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल 2122   1212  22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत में क्या से क्या हो गए महब्बत में मैं…"
Wednesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"  आपका हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी   "
Wednesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा एकादश. . . . . पतंग
"आदरणीय सुशील सरनाजी, पतंग को लगायत दोहावलि के लिए हार्दिक बधाई  सुघड़ हाथ में डोर तो,…"
Wednesday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय रवि भसीन 'शहीद' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला ग़ज़ल तक आए और हौसला…"
Wednesday
Sushil Sarna posted blog posts
Feb 3

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service