For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

मेरे हाथों में तारे देख कर वो क्यूँ जला है

१२२२   १२२२    १२२२   १२२

मेरे हाथों में तारे देख कर वो क्यूँ जला है

मेरे मालिक तेरा इंसान जाने क्या बला है

 

लड़ा ताउम्र दरिया हौसलों के साथ अपने

लगाया था गले जिनको उन्हें ही क्यूँ खला है

 

घुसे थे झाड़ियों में तो बहुत ज्यादा संभलकर

थे हम भी बेखबर उस नाग से जो घर पला है   

 

बड़ा मुश्किल है फहराना ये परचम शोहरत का

यकीनन  कारवा पहले या आखिर में चला है

 

नहीं शिकवा गिला हमको कभी भी आपसे था

कभी खिलता ये  गुल भी नागफनियों में भला है

 

हकीकत की ही तो मैं सच बयानी कर रहा हूँ  

सफ़र में जो चला है वो अकेला ही चला है

 

जिगर के गहरे में ये अजनबी सा डर है मेरे

भला इंसान क्यूँ लगता नहीं मुझको भला है

 

  

 

मौलिक व अप्रकाशित 

Views: 685

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Maheshwari Kaneri on June 13, 2014 at 7:18pm

बहुत खूबसूरत गजल ,आशुतोष जी  हौसला बढाने के लिए आभार आप का 

Comment by Meena Pathak on June 12, 2014 at 9:51pm

क्या बात है .. बहोत खूब ... बधाई 

Comment by annapurna bajpai on June 12, 2014 at 7:56pm

वाह !! बहुत खूबसूरत गजल , आ0 आशुतोष जी । 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on June 12, 2014 at 6:01pm

आदरनीय आशुतोष भाई , बहुत खूब सूरत ग़ज़ल हुई है , आपको हार्दिक बधाइयाँ ॥

जिगर के गहरे में ये अजनबी सा डर है मेरे

भला इंसान क्यूँ लगता नहीं मुझको भला है --- बहुत खूब भाई जी , बधाई ॥

 

Comment by Dr Ashutosh Mishra on June 12, 2014 at 2:02pm

आदरणीय लक्षमण जी हौसल अफजाई के लिए तहे दिल शुक्रिया सादर 

Comment by Dr Ashutosh Mishra on June 12, 2014 at 2:00pm

आदरणीय गोपाल सर..आपकी प्रतिक्रिया मेरे लिए आशीर्वाद है ..जिसकी मैं सतत कामना करता हूँ ..हार्दिक धन्यवाद और सादर प्रणाम के साथ 

Comment by Dr Ashutosh Mishra on June 12, 2014 at 1:59pm

आदरणीया डॉ प्राची जी ..आपके ये शब्द मेरा मनोबल बढाते हैं ..मुझे रचना धर्मिता की नयी उर्जा प्रदान करते हैं ..भविष्य में भी आपकी प्रतिक्रियाओं मुझे मिलती रहेगी इसी कामना के साथ ..सादर 

Comment by Dr Ashutosh Mishra on June 12, 2014 at 1:53pm

आदरणीय नरेन्द्र जी ..रचना पर आपकी प्रतिक्रिया के लिये हार्दिक आभार ..सादर 

Comment by Dr Ashutosh Mishra on June 12, 2014 at 1:23pm

आदरणीय जीतेन्द्र जी ..आपकी स्नेहिल शब्दों के लिए लिए तहे दिल शुक्रिया ..सादर 

Comment by Dr Ashutosh Mishra on June 12, 2014 at 1:20pm

आदरनीय अभिनव जी ..उत्साहवर्धक आपकी इस प्रतिक्रिया के लिए  तहे दिल धन्यवाद ..सादर प्रणाम के साथ 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला आपकी…"
3 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। सुंदर गजल हुई है। भाई रवि जी की सलाह से यह और निखर गयी है । हार्दिक…"
6 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन ।फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
16 hours ago
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल 2122   1212  22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत में क्या से क्या हो गए महब्बत में मैं…"
19 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"  आपका हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी   "
22 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा एकादश. . . . . पतंग
"आदरणीय सुशील सरनाजी, पतंग को लगायत दोहावलि के लिए हार्दिक बधाई  सुघड़ हाथ में डोर तो,…"
22 hours ago
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय रवि भसीन 'शहीद' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला ग़ज़ल तक आए और हौसला…"
yesterday
Sushil Sarna posted blog posts
yesterday
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय Jaihind Raipuri जी,  अच्छी ग़ज़ल हुई। बधाई स्वीकार करें। /आयी तन्हाई शब ए…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on रामबली गुप्ता's blog post कर्मवीर
"कर्मवीरों के ऊपर आपकी छांदसिक अभिव्यक्ति का स्वागत है, आदरणीय रामबली गुप्त जी.  मनहरण…"
yesterday
Jaihind Raipuri posted a blog post

ग़ज़ल

2122    1212    22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत मेंक्या से क्या हो गए महब्बत में मैं ख़यालों में आ गया उस…See More
Tuesday
Jaihind Raipuri commented on Admin's group आंचलिक साहित्य
"कुंडलिया छत्तीसगढ़ी छत्तीसगढ़ी ह भाखा, सरल ऐकर बिधान सहजता से बोल सके, लइका अऊ सियान लइका अऊ…"
Tuesday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service