For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

नैतिकता के पतन से, फैला कंस प्रभाव॥
मात- पिता सम्मान नहि, नस नस में दुर्भाव॥

पश्चिम संस्कृति जी रहे, हम भूले निज मान।
कहते हम संतान कपि, जबकि हैं हनुमान॥

निज गौरव को भूलकर, बनते मार्डन लोग।
ये भी क्या मार्डन हुए, पाल रहे बस रोग॥

अपने घर में त्यक्त है, वैदिक ज्ञान महान।
महा मूढ़ मतिमंद हम, करते अन्य बखान॥

लौटें अपने मूल को, जो है सबका मूल।
पोषित होता विश्व है, सार बात मत भूल॥

मौलिक व अप्रकाशित

Views: 1197

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी on February 3, 2014 at 6:12pm
आदरणीय सौरभ सर जी! यद्यपि पढ़ा तो था, किन्तु पुन: पढ़ता हूँ। यदि आपने संकेत किया है तो अवश्य पढ़ने में त्रुटि हुई है, सम्भव है समझने में भी त्रुटि हुई हो।
इसके बाद दोहों में सुधार करता हूँ।
सादर

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on January 31, 2014 at 2:19pm

भाई विंध्श्वरीजी, पहली बात, क्या आपने जनवरी माह के छंदोत्सव की भूमिका को सही ढंग से पढ़ा लिया है ? या, आयोजन कीभूमिका  दोहा और रोला छंदों पर आधारित होने के कारण उसके प्रति कोई जिज्ञासा ही नहीं बनी ?

जो कुछ आदरणीया प्राची जी ने उद्धृत किया है क्या उस पर उस भूमिका में चर्चा नहें हुई है ? उसके प्रति अगाह नहीं किया गया है ? कृपया देख लीजियेगा

और, सिर्फ़ कथ्य पर वाह वाह क्या करूँ. यह तो हमें मालूम ही है कि आप सामाजिक विडम्बनाओं के प्रति अत्यंत संवेदनशील हैं. तभी ऐसे कथ्य आपसे अपेक्षित भी हैं.

शुभेच्छाएँ

Comment by विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी on January 25, 2014 at 5:48pm
भाई अरुण शर्मा जी! रचना पर समय देने एवं सराहना करने लिये आपका आभार।
Comment by विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी on January 25, 2014 at 5:47pm
आदरणीया अन्नपूर्णा जी! आपका हार्दिक आभार।
Comment by विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी on January 25, 2014 at 5:46pm
आदरणीया सरिता जी! आपका हृदय तल से आभार।
Comment by विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी on January 25, 2014 at 5:44pm
आदरणीया प्राची दीदी जी! आपने अपने व्यस्ततम जीवन से मुझ प्रशिक्षु के दोहों के लिये समय निकाल कर रचना और मुझे दोनों को कृतार्थ किया है। जिसके लिये मैं आपका आभारी हूँ।
शिल्प के सम्बंध में आपने दोहावली का सूक्ष्मता से मूल्यांकन किया है। निश्चय ही यह रचनाकर्म में आचरणीय है। मैं आप द्वारा निर्देशित त्रुटियों को यथाशक्य दूर करने का प्रयत्न करता हूँ।
सादर

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on January 24, 2014 at 12:35pm

नैतिक मूल्यों के पतन पर बहुत सुन्दर दोहावली प्रस्तुत की है प्रिय विन्ध्येश्वरी जी... इस उन्नत भाव प्रवण प्रस्तुति के लिए दिली बधाई.

अब मैं आपके एक दोहे के माध्यम से शिल्प पर भी कुछ कहने से खुद को रोक नहीं पा रही हूँ..

नैतिकता के पतन से, फैला कंस प्रभाव॥
मात- पिता सम्मान नहि, नस नस में दुर्भाव॥

... प्रस्तुत दोहे के शिल्प को यदि हम सूक्ष्मता से देखें तो-

नैतिकता के पतन से , विषम चरण का अंत १११ या २१२ से किये जाने की मान्यता है पर यहाँ पतन का उच्चारण 12 होने के कारण विषम चरण का अंत १२२ जैसा प्रतीत हो रहा है

मात- पिता सम्मान नहि , सम्मान्नहि जैसा उच्चारण हो रहा है जिससे शाब्दिक ध्वनि का दोष बन रहा है और दोनों शब्दों का अलग अलग उच्चारण स्पष्ट नहीं हो रहा.

ये कुछ सूक्ष्म बाते हैं जिन पर आजकल मंच पर यदा कदा चर्चाएँ होती रहती हैं.. यहाँ सांझा करना निश्चय ही आपको लाभान्वित करेगा ऐसी उम्मीद है.

शुभकामनाएं 

Comment by विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी on January 24, 2014 at 12:04pm
आदरणीय गिरिराज जी! आपका हार्दिक आभार।
Comment by विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी on January 24, 2014 at 12:00pm
आदरणीय लक्ष्मण प्रसाद जी! आपका हार्दिक आभार।
Comment by विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी on January 24, 2014 at 11:58am
आदरणीय शिज्जू जी! आपका हार्दिक आभार।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

आशीष यादव added a discussion to the group भोजपुरी साहित्य
Thumbnail

शिव भजन (पूर्वी छपरहिया धुन)

भोला की भजsनिया मेंमन हमार लागल जियुवा पागल भइलें भोला में ही मनs अनुरागल जियुवा पागल भइलें बिच्छू…See More
1 hour ago
pratibha pande replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"चौपाई छंद ______ अमराई में उत्सव छाया,कोयल को न्यौता भिजवाया। मौसम बदले कपड़े -लत्ते, लगे झूमने…"
1 hour ago
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"आदरणीय तिलकराज कपूर जी, मुझे बड़े खेद के साथ कहना पड़ता है कि आपने मेरी रचना पर टिप्पणी नहीं की। आप…"
2 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"चौपाई छंद ( संशोधित ) ++++++++++++++++   ठंड गई तो फागुन आया। जन मानस में खुशियाँ लाया॥ आम…"
4 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"बाल-युवा मिल उधम मचाएं, रंग-गुलाल-अबीर उड़ाएं  वाह !!! अजय भाई इससे बढ़िया और क्या…"
4 hours ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"लघुकथा पर अच्छा प्रयास हुआ है अखिलेश भाई। पढ़ने में रोचक तो है। विशेष टिप्पणी तो इस विधा के जानकार…"
4 hours ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"छंदों पर अपनी प्रतिक्रिया से उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक आभार आदरणीय भाई अखिलेश जी।  मात्रा की…"
4 hours ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय भाई अखिलेश जी, आपको भी नववर्ष 2083 की अनेक शुभकामनाएं।  उपरोक्त चर्चा को आगे बढ़ाते हुए…"
5 hours ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"वैसे आप मूल शेर में ही  दौलत-ए-ग़म मिली है क़िस्मत से // कर दें तो भी बह्र बरक़रार रहती है। और…"
5 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"अनुरोध - कर्कश स्वर को पंचम स्वर पढ़ें ...... धन्यवाद "
7 hours ago
amita tiwari posted a blog post

प्यादे मान लिये जाते हैं मात्र एक संख्या भर

प्यादे : एक संख्या भरप्यादे— बेकसूर, बेख़बर, नियति और नीति से अनजान—अक्सर मान लिये जाते हैंमात्र एक…See More
10 hours ago
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"अच्छा है। "
18 hours ago

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service