For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

कैसा ये जीवन हुआ, दिन प्रति बढ़े विकार

लोभ, मोह, मद, दंभ भी, नित लेते आकार  

नित लेते आकार, स्वार्थ के सर्प अनूठे

बाँट रहे संदेह, नेह के बंधन झूठे

मन में फैली रेह, भाव है ठूंठों जैसा

संवेदन अब शून्य, मूल्य संस्कृति का कैसा

                - बृजेश नीरज

(मौलिक व अप्रकाशित)

Views: 839

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by बृजेश नीरज on October 29, 2013 at 10:40pm

आदरणीया प्राची जी आपका हार्दिक आभार!

'ठूंठों' शब्द के प्रयोग पर मुझे भी संशय निवारण की प्रतीक्षा रहेगी. वैसे मेरा मंतव्य यहाँ ये था की हर भाव ठूंठ के जैसा है, इसीलिए 'ठूंठों' शब्द का प्रयोग किया.

सादर! 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on October 29, 2013 at 7:34pm

आदरणीय बृजेश जी 

सुन्दर छन्द रचना हुई है..दोहा अंश तो बेहद सामिक यथार्थ शब्द चित्र प्रस्तुत करता है..

कैसा ये जीवन हुआ, दिन प्रति बढ़े विकार

लोभ, मोह, मद, दंभ भी, नित लेते आकार 

नित लेते आकार, स्वार्थ के सर्प अनूठे...........................स्वार्थ के सर्प .....वाह! सुन्दर 

बाँट रहे संदेह, नेह के बंधन झूठे

मन में फैली रेह, भाव है ठूंठों जैसा................................भाव के साथ ठूंठों फिर जैसा ....भाव और जैसा तो एक वचन हैं पर ठूंठों बहुवचन शब्द है.. शायद यह व्याकरणीय रूप से अशुद्ध हो.. सुधिजनों से इस संशय का निवारण अपेक्षित है.

संवेदन अब शून्य, मूल्य संस्कृति का कैसा

सादर शुभकामनाएं 

Comment by बृजेश नीरज on October 24, 2013 at 8:42pm

आदरणीय सुशील जी आपका हार्दिक आभार! सच कहूं तो इस ओर वास्तव में मेरा ध्यान ही नहीं गया! इस सुझाव हेतु आपका हार्दिक आभार!

Comment by Sushil.Joshi on October 24, 2013 at 7:46pm

बहुत ही सुंदर एवं सार्थक छंद है आ0 बृजेश जी..... बस मुझे लगता है कि दोहे के द्वितीय चरण में 'दिन प्रति' के क्रम की अदला बदली कर क्रमश: 'प्रति दिन' कर दिया जाए तो और अधिक लयबद्ध हो जाएगा.... वैसे यह मेरा निजी विचार है.....

कैसा ये जीवन हुआ, प्रति दिन बढ़े विकार।

लोभ, मोह, मद, दंभ भी, नित लेते आकार।। ........

Comment by बृजेश नीरज on October 23, 2013 at 9:46pm

आदरणीया कुंती जी आपका हार्दिक आभार!

Comment by बृजेश नीरज on October 23, 2013 at 9:45pm

आदरणीय राम भाई आपको दो बार बहुत बहुत धन्यवाद!

Comment by ram shiromani pathak on October 23, 2013 at 8:40pm

वाह वाह बहुत ही सुन्दर कुण्डलियाँ छंद आदरणीय भाई ब्रिजेश जी //हार्दिक बधाई आपको 

Comment by ram shiromani pathak on October 23, 2013 at 4:47pm

आदरणीय बृजेश भाई,बहुत सुन्दर कुंडलिया //बहुत बधाई आपको 

Comment by coontee mukerji on October 23, 2013 at 2:22pm

मन में फैली रेह, भाव है ठूंठों जैसा

संवेदन अब शून्य, मूल्य संस्कृति का कैसा.....बहुत सुंदर एवम सटीक.बृजेश जी.शुभकामनाएँ सहित

कुंती.

Comment by बृजेश नीरज on October 22, 2013 at 7:15am

आदरणीय अनुराग जी आपका हार्दिक आभार!

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity


सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"  उत्साहित बने रहने और सतत चलते रहने के सुझाव से निस्सृत होती सकारात्मकता का आयाम आश्वस्तिकारी…"
2 hours ago
धर्मेन्द्र कुमार सिंह replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"जब कविता कोश चल सकता है तो ओबीओ क्यूँ नहीं। वहाँ भी शुरू में जो लोग थे आज नहीं हैं। नए-नए लोग…"
Saturday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"चर्चा में आपकी उपस्थिति तथा आपके भावमय शब्दों का स्वागत है आदरणीय मिथिलेश जी. "
Saturday
Sheikh Shahzad Usmani commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post "प्यारी दुश्मन" -[लघु कथा] (18)
"मेरी इस रचना के अवलोकन हेतु पाठकों को हार्दिक धन्यवाद।"
Friday
Sheikh Shahzad Usmani commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post "शह और शिकस्त" - [लघुकथा] 25 (शतरंज संदर्भित) - शेख़ शहज़ाद उस्मानी
"मेरी इस रचना पर 446 अवलोकन हेतु हार्दिक आभार पाठकों के प्रति।"
Friday
Sheikh Shahzad Usmani commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post सूरज के तेवर (लघुकथा) [छंदोत्सव-58 चित्र से प्रेरित] /शेख़ शहज़ाद उस्मानी
"रचना पटल पर उपस्थिति, समीक्षात्मक टिप्पणी और सवाल हेतु हार्दिक धन्यवाद आदरणीया कान्ता रॉय जी। मेरी…"
Friday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
" सादर नमस्कार आदरणीय मंच। कुछ अन्य सुझाव: 1- सदस्यों से सहयोग राशि एकत्रित कर ओबीओ की पत्रिका…"
Jun 1
आशीष यादव replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"अच्छा सुझाव"
Jun 1
Gajendra shrotriya replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"प्रतिष्ठित मंच के सभी सम्माननीय सदस्यों को सादर प्रणाम🙏ओ बी ओ परिवार के समक्ष बनी इस विषम परिस्थिति…"
May 31
Manjeet kaur replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"ओ बी ओ मंच से बहुत कुछ सीखने को मिला इसके बंद होने की खबर दुखद और पीड़ादाई लगी। अजय गुप्ता जी की…"
May 30
Manjeet kaur commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"धर्मेंद्र कुमार जी आज के मुश्किल दौर में इतना जिगरा ! यथार्थ और सटीक वर्णन के लिए बहुत बहुत बधाई"
May 30
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा सप्तक. . . .मंच

दोहा सप्तक. . . . . मंचअभिनय करते मंच पर, माटी के किरदार ।जीवन की अनुभूतियाँ, करते वो साकार ।।यह जग…See More
May 30

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service