For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

कुण्डलियाँ [ माँ ]

मैया दस्तक दे रही ,खोलो मन के द्वार
मात कृपा से हो सदा ,हर सपना साकार //
हर सपना साकार ,जा कर द्वार पर कर लो
देती माँ आशीष , झोलियाँ खाली भर लो
सरिता करे पुकार ,तार माँ सबकी नैया
दे दर्शन चढ़ शेर ,सदा जगदम्बे मैया//

तेरे दर पर हूँ खड़ी,नतमस्तक कर जोड़
सर पर रखना हाथ माँ, दुख जाएँ दर छोड़
दुख जाएँ दर छोड़ ,हो साकार हर सपना
रहे न पारावार दो आशीष माँ अपना
भेंट करो स्वीकार, कब से लगाती फेरे
दर्शन देदो मात ,दर पर खड़ी मैं तेरे //

...............................................

          मौलिक व अप्रकाशित 

Views: 803

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on October 17, 2013 at 12:00am

छंदोत्सव आयोजन में कुण्डलिया छंद का शाब्दिक विन्यास आप ही से साझा किया था हमने न ? आपको ध्यान देना था, आदरणीया. देखिये कई सुधीजन प्रवाह में व्यवधान की बात कर रहे हैं. खैर .. .

शुभ-शुभ

Comment by Sarita Bhatia on October 9, 2013 at 6:31pm

आदरणीया प्राची जी शुक्रिया मार्गदर्शन करती रहें 

Comment by Sarita Bhatia on October 9, 2013 at 6:29pm

आदरणीय सुशील जोशी जी आपने बिलकुल सही कहा 

मैंने पर के स्थान पर पे हि लिखा था जब किसी मित्र को जांचने के लिए कहा तो उन्होंने बदल दिया यहाँ मुझे भी थोड़ी बाधा लग रही है 

Comment by Sarita Bhatia on October 9, 2013 at 6:27pm

आदरनीय दिलीप जी शुक्रिया 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on October 9, 2013 at 2:52pm

आ० सरिता जी 

माँ दुर्गा को समर्पित सुन्दर छंद.

प्रवाह कहीं कहीं बाधित है.. थोड़ा सा और साधने की आवश्यकता प्रतीत हो रही है.

शुभकामनाएं 

Comment by Sushil.Joshi on October 9, 2013 at 5:23am

नवरात्र महोत्सव में सुंदर कुण्डलिया हैं आदरणीया सरिता जी..... शिल्प के साथ यदि थोड़ा प्रवाह पर भी ध्यान दिया जाए तो मज़ा दुगुना हो जाए....

हर सपना साकार ,जा कर द्वार पर कर लो......  इसको यदि 'हर सपना साकार, जा कर द्वार पे कर लो' लिखा जाए तो शायद अधिक प्रवाहमय हो जाता है, ऐसा मुझे लगता है..... इसी प्रकार कुछ अन्य स्थान पर भी ध्यान देने की आवश्यकता है..... बधाई इस कृति के लिए.....

Comment by दिलीप कुमार तिवारी on October 9, 2013 at 12:11am

आदरणीया सरिता जी बहुत सुन्दर कुन्डलिया ,,,,बधाई आपको

Comment by Sarita Bhatia on October 8, 2013 at 6:42pm

आदरणीय भाई विजय मिश्र जी हार्दिक अभिनन्दन ,स्नेह बनाए रखें 

Comment by Sarita Bhatia on October 8, 2013 at 6:41pm

आदरणीय गिरिराज शुक्रिया 

Comment by Sarita Bhatia on October 8, 2013 at 6:40pm

आदरणीय  राज बुन्देली जी हार्दिक आभार 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"इश्क़ तो है मगर ये इतनी भी शा'इराना नहीं कि तुझ से कहें साफ़ गोई सुनोगे क्या तुम ये अहमकाना…"
6 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"एक सप्ताह के लिए सभी चार आयोजन के द्वार खुल गए। अच्छी बात ये है कि यह एक प्रयोग है ..... लेकिन…"
yesterday
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"चौपाई छंद ++++++++   ठंड गई तो फागुन आया। जन मानस में खुशियाँ लाया॥ आम  लगे सब हैं…"
yesterday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"सच फ़साना नहीं कि तुझ से कहें ये बहाना नहीं कि तुझ से कहें दिल अभी जाना नहीं कि तुझ से कहें ग़म…"
yesterday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"सादर अभिवादन "
yesterday
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"सभी की नमस्कार, यूँ तो आज आयोजन प्रारंभ ही हुए हैं और किसी प्रकार की टिप्पणी करना उचित नहीं है,…"
yesterday
Admin replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"स्वागतम"
yesterday
Admin replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"स्वागतम"
yesterday
Admin replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"स्वागतम"
yesterday
Admin replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-184
"स्वागतम"
yesterday
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"आपकी बात से सहमत हूँ। यह बात मंच के आरंभिक दौर में भी मैंने रखी थी। अससे सहजता रहती। लेकिन उसमें…"
Monday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा सप्तक. . . .विविध

दोहा सप्तक. . . . . . विविधकभी- कभी तो कीजिए, खुद से खुद की बात ।सुलझेंगे उलझे हुए,  अंतस के हालात…See More
Monday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service