For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

जिजीविषा - (रवि प्रकाश)

नगरी-नगरी
फूटी गगरी
लेकर पानी
पीना है।
मेरी छानी
गारा-मिट्टी
तेरा आँगन
भीना है।
रेशम-रेशम
तेरा आँचल
मेरा कुर्ता
झीना है।
शैल-शिखर सा
मस्तक तेरा
मेरा बोझिल
सीना है।
दुनिया,तूने
बीच भँवर में
आस-आसरा
छीना है।
अन्धकार में
आँखें फाड़े
जुगनू-जुगनू
बीना है।
खुली हथेली
ख़ाली बर्तन
फिर भी हमको
जीना है।

-मौलिक एवं अप्रकाशित।

Views: 932

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Ravi Prakash on October 8, 2013 at 9:01pm
आ॰ प्राची जी, आपको पंक्तियाँ पसंद आईं, मेरा लिखना सार्थक हुआ। सराहना तथा उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on October 8, 2013 at 9:01pm

अन्धकार में
आँखें फाड़े
जुगनू-जुगनू
बीना है।
खुली हथेली
ख़ाली बर्तन
फिर भी हमको
जीना है।वाह्ह्ह्ह बहुत ही सुन्दर मर्मस्पर्शी प्रस्तुति आपकी हार्दिक बधाई आपको रवि प्रकाश जी 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on October 8, 2013 at 8:27pm

बहुत सुन्दर प्रस्तुति आ० रवि प्रकाश जी 

हर बंद विशेष है.. 

मेरी छानी
गारा-मिट्टी
तेरा आँगन
भीना है।........... वाह!

अन्धकार में
आँखें फाड़े
जुगनू-जुगनू
बीना है।..............जितनी तारीफ़ की जाए इन पंक्तियों की कम ही होगा 

बहुत बहुत बधाई 

Comment by Ravi Prakash on October 8, 2013 at 7:06pm
आदरणीय, मेरे प्रयासों में जो भी सरस और श्रेष्ठ यदा-कदा दृष्टिगोचर होता है, वह आप जैसे सुधी जनों के आशीर्वाद और इस शिक्षाप्रद एवं गरिमामय मंच से ही सीखा है। मैं पुनः पुनः आपको धन्यवाद देता हूँ। कृपया मार्गदर्शन करते रहें।
Comment by विजय मिश्र on October 8, 2013 at 6:30pm
रविजी ,छेड़कर आपने मुझे पुनः लिखने को बाध्य किया है -यह छूट गया था , शीर्षक का चयन या कहें कि शीर्षक को दृष्टि में रख रचना का गढन ,आपमें इसकी भी अपूर्व क्षमता है , यह सदैव विषय के केन्द्र में होता है .दूसरा मै आपके शब्द सामर्थ्य को भी नमस्कार करता हूँ ,तिलस्मी खजाना है और यह मैं समझ पा रहा हूँ कि इतने सुंदर सृजन के पार्श्व में कितना गहन अध्ययन प्रछन्न रूप से विद्यमान होता है,माँ शारदे आपकी प्रखरता को और प्रखरतर करें . पुनश्च धन्य ....धन्य ...आनंद .
Comment by Ravi Prakash on October 8, 2013 at 5:52pm
आ॰ विजय जी, इतना स्नेह एवं साधुवाद पा कर निःसंदेह मन को असीम तृप्ति और आनंद प्राप्त हुआ है। ज़र्रानवाज़ी के लिए शुक्रिया। आशीर्वाद बनाए रखें।
Comment by विजय मिश्र on October 8, 2013 at 5:42pm
रविजी ,शब्द केलिए मगजमारी करनी पड़ती है आपकी रचनाओं की श्रेष्ठता को आदर देने केलिए .वास्तव में शब्द संयोजन ,अंतर्निहित भाव और सुगम प्रवाह का अद्भुत सममिश्रण है आपकी यह मधुर कव्यमाधुरी . जितनी प्रसंशा करो ,मन तृप्त नहीं होता . धन्य .
Comment by Ravi Prakash on October 7, 2013 at 9:53pm
सराहना तथा उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद। आशीर्वाद बनाए रखें॥
Comment by Meena Pathak on October 7, 2013 at 9:29pm

खुली हथेली
ख़ाली बर्तन
फिर भी हमको
जीना है।.............. बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति...बधाई स्वीकारें आदरणीय 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on October 7, 2013 at 8:28pm

आदरणीय रवि प्रकाश भाई , बहुत कम शब्दों मे बहुत सुन्दर रचना हुई है !!!! वाह !! ! बधाई !!!

खुली हथेली
ख़ाली बर्तन
फिर भी हमको
जीना है। -------------- वाह वाह !!!!!!

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Admin posted a discussion

"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185

आदरणीय साहित्य प्रेमियो,जैसाकि आप सभी को ज्ञात ही है, महा-उत्सव आयोजन दरअसल रचनाकारों, विशेषकर…See More
14 hours ago
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैं
"आदरणीय रवि भसीन 'शाहिद ' जी सादर अभिवादन प्रथम तो मैं क्षमाप्रार्थी हूँ देरी से आने की…"
yesterday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा दशम. . . . . उम्र

दोहा दशम् . . . . उम्रठहरी- ठहरी उम्र अब, करती एक सवाल ।कहाँ गई जब जिंदगी, रहती थी खुशहाल ।।यादों…See More
Monday
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Jaihind Raipuri 's blog post वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैं
"आदरणीय Jaihind Raipuri साहिब, नमस्कार। बढ़िया ग़ज़ल हुई है, बधाई स्वीकार करें। /ये मेरा…"
Friday
आशीष यादव added a discussion to the group धार्मिक साहित्य
Thumbnail

चल मन अब गोकुल के धाम

चल मन अब गोकुल के धाम अद्भुत मनहर बाल रूप में मिल जाएंगे श्याम कि चल मन अब……………………….कटि करधनी शीश…See More
Friday
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदरणीय अशोक भाईजी धन्यवाद ... मेरा प्रयास  सफल हुआ।"
Mar 31
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"वाह वाह वाह !!! बहुत दिनों बाद ऐसी लाजवाब प्रतिक्रिया पढने में आई है। कांउटर अटैक ॥ हजारों धन्यवाद…"
Mar 31
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"  आदरणीय शेख शाहज़ाद उस्मानी जी सादर, सरकारी शालाओं की गलत परम्परा की ओर ध्यान आकृष्ट कराती…"
Mar 31
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"सार्थक है आपका सुझाव "
Mar 31
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदाब।‌ रचना पटल पर उपस्थिति और समीक्षाओं हेतु हार्दिक धन्यवाद आदरणीया प्रतिभा पाण्डेय जी। मेरी…"
Mar 31
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"हार्दिक धन्यवाद आदरणीया प्रतिभाजी ।  इसमें कुछ कमी हो सकती है लेकिन इस प्रकार के आयोजन शहरों…"
Mar 31
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव साहब सादर, बिना सोचे बोलने के परिणाम पर सुन्दर और संतुलित लघुकथा…"
Mar 31

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service