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कई साल बाद लौटा
बहुत कुछ बदला लगा
विकास ही विकास
कस्बा अब शहर हो चुका है

अरे ये क्या ?
जहाँ पेड़ों का एक झुण्ड था
वहाँ बड़ी बड़ी इमारतें
सीना ताने खड़ीं है
मृत पेड़ों की देह पर
ठहाके मारती

कोई दुःख नहीं 
पेड़ों की
अकाल मृत्यु पर 

विकास रुपी राक्षस को बलि देकर

खुश थे लोग

******************************

राम शिरोमणि पाठक"दीपक"
मौलिक/अप्रकाशित

Views: 739

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Comment by ram shiromani pathak on September 5, 2013 at 7:22pm

हार्दिक आभार आदरणीय लक्ष्मन जी//सादर 

Comment by ram shiromani pathak on September 5, 2013 at 7:21pm

हार्दिक आभार आदरणीय भाई ब्रिजेश जी ,मेरा प्रयास आपको अच्छा लगा तो मेरा लिखना भी  सफल //सादर 

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on September 5, 2013 at 6:35pm

सुन्दर भाव रचना प्रस्तुति के लिए बधाई श्री राम शिरोमणि जी 

Comment by बृजेश नीरज on September 5, 2013 at 3:36pm

आदरणीय राम भाई बहुत सुंदर प्रयास है आपका। आपको हार्दिक बधाई!

Comment by ram shiromani pathak on September 5, 2013 at 11:37am

बहुत बहुत आभार आदरणीय रविकर जी  //सादर  

Comment by ram shiromani pathak on September 5, 2013 at 11:37am

बहुत बहुत आभार आदरणीय अभिनव अरुण जी उत्साह वर्धन  के लिए //सादर  

Comment by ram shiromani pathak on September 5, 2013 at 11:36am

बहुत बहुत आभार आदरणीया  वंदना जी उत्साह वर्धन  के लिए //सादर  

Comment by ram shiromani pathak on September 5, 2013 at 11:34am

बहुत बहुत आभार आदरणीय सुरेन्द्र शुक्ल   जी //सादर  

Comment by ram shiromani pathak on September 5, 2013 at 11:33am

बहुत बहुत आभार आदरणीया मीना  जी //सादर  

Comment by ram shiromani pathak on September 5, 2013 at 11:33am

बहुत बहुत आभार आदरणीया अन्नपूर्णा  जी //सादर  

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