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मुझसे मेरी हयात ऐसी दिल्लगी करे
मंजिल का मेरी फैसला आवारगी करे

तुझसे भी हैं ज़रूरी दुनिया में और काम
सब को भुला के कौन तेरी बंदगी करे

बेपीर बेमुरव्वत मुझसे न पूंछ कुछ भी
मेरा बयान-ए-हाल ये बेचारगी करे

मुद्दत से थोड़े ख्वाब सहेजे हैं आँख में
की इंतज़ार-ए-आब जैसे तिश्नगी करे

हर रोज सबसे छुप कर किसकी हैं ये दुआएं
शामों में आफताब सी ताबिन्दगी करे

रोऊँ तो ये हंसाए, हँसता हूँ तो रुलाए
मुझको यूँ परेशान मेरी जिंदगी करे

हैं गुम कहाँ उजाले खुशियों के संग बोलो
“ऋषि” से यही सवाल घर की तीरगी करे

अनुराग सिंह “ऋषी”
29/06/2013

मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 817

Comment

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Comment by Anurag Singh "rishi" on July 29, 2013 at 7:10am
आभार आपका Shashi Vivek जी
सादर
Comment by Shashi Vivek on July 24, 2013 at 8:24am

Beautiful.

Comment by Anurag Singh "rishi" on July 10, 2013 at 8:26am

आदरणीय अरुन जी मै सच कहूँ तो ग़ज़लों के अरूज़ का बहुत ज्यादा ज्ञान नही है हमें महज गुनगुनाने की आदत है क्लिष्ठ तकनीकी ज्ञान के लिए ही यहाँ प्रवेश लिया है आप सभी के सानिध्य से मुझ जैसे अज्ञानी को भी कुछ अंश ज्ञान प्राप्त होगा ऐसा मेरा विश्वास है
साथ ही आप से एक निवेदन है बहर गिनने के कुछ उसूल मालूम है पर पूर्णतयः तकतीअ नही कर पाता यदि आप मुझे सिखाने की कृपा करें तो आभार होगा और मेरा सौभाग्य भी
सादर

Comment by Anurag Singh "rishi" on July 10, 2013 at 8:18am

डॉ बब्बन जी आपको भी नमन मेरा एवं आभार
सादर

Comment by Anurag Singh "rishi" on July 10, 2013 at 8:18am

आदरणीय जितेन्द्र सर , विजय मिश्र जी , कुंती मुखर्जी जी आप सभी को तहेदिल से शुक्रिया एवं प्रणाम निवेदित है स्नेह बनाये रखें
सादर

Comment by Anurag Singh "rishi" on July 10, 2013 at 8:16am

आदरणीय बसंत नेमा जी , श्याम नारायण जी ह्रदय से आभार आपका सर

Comment by अरुन 'अनन्त' on July 1, 2013 at 4:20pm

आदरणीय अनुराग भाई कुछ अधिक कहने से पहले बहर जानना चाहूँगा कृपया अवगत करायें अधिक ज्ञान नहीं है. निम्नांकित शेर ने दिल को छू लिया इस हेतु बधाई स्वीकारें.

रोऊँ तो ये हंसाए, हँसता हूँ तो रुलाए
मुझको यूँ परेशान मेरी जिंदगी करे .... लाजवाब शे'र

CTRL + Q to Enable/Disable GoPhoto.it
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Comment by Dr Babban Jee on June 30, 2013 at 12:20am

Congratulations Anurag Ji for this fine creation.

Comment by coontee mukerji on June 29, 2013 at 6:13pm

रोऊँ तो ये हंसाए, हँसता हूँ तो रुलाए
मुझको यूँ परेशान मेरी जिंदगी करे...बहुत खूब.

Comment by विजय मिश्र on June 29, 2013 at 5:54pm
"रोऊँ तो ये हंसाए, हँसता हूँ तो रुलाए
मुझको यूँ परेशान मेरी जिंदगी करे

हैं गुम कहाँ उजाले खुशियों के संग बोलो
“ऋषि” से यही सवाल घर की तीरगी करे " -- ये तो आमओखास की कहानी है और आपके इस प्यारी गज़ल की जुबानी बहुत करीने से निकल कर बाहर आयी है .

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