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हाय जनता 
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प्रतिष्ठान के मालिक ने 

होली मिलन मनाया 
सभासद सांसद सहित  
मेरा भी न्योता आया 
हारे जीते नेता सब आये 
उपलब्धि के  गीत थोथे गाये 
संघर्ष बहुत किया भारी 
तब आयी जीतन की बारी 
विकास क्षेत्र का कर दूंगा 
बदले में वोट केवल  लूँगा 
करतल ध्वनी हुई भारी 
टूटी नयनों की खुमारी 
वादा फिर करते झूठा 
हाय जनता  भ्रम न टूटा 
बार बार तुम छले जाते 
जोड़े रहते तब भी नाते 
प्रदीप कुमार सिंह कुशवाहा 
1-4-2013 
मौलिक / अप्रकाशित 

Views: 458

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Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on April 12, 2013 at 6:10pm

स्नेही केवल प्रसाद जीसादर आभार 

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on April 12, 2013 at 6:09pm

आदरणीय गुरुदेव सौरभ सर जी 

आपके हस्ताक्षर मेरी संतुष्टि है.

सादर  आभार 

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on April 12, 2013 at 6:04pm

स्नेही पाठक जी 

सादर आभार 

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on April 12, 2013 at 6:04pm

आदरणीय डॉ अजय जी 

सादर आभार स्नेह हेतु 

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on April 12, 2013 at 6:02pm

आदरणीया प्राची जी 

स्नेह हेतु सादर आभार 

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on April 2, 2013 at 6:34pm

आदरणीय, प्रदीप कुमार सिंह कुशवाहा जी, हां! जनता तो ऐसी ही है...‘हाय जनता भ्रम न टूटा
बार बार तुम छले जाते
जोड़े रहते तब भी नाते ‘ सुन्दर रचना। बहुत बहुत बधाई।


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on April 2, 2013 at 4:44pm

सामयिक रचना पर हार्दिक बधाई, आदरणीय प्रदीपजी.. .

Comment by ram shiromani pathak on April 2, 2013 at 1:54pm

इस सामयिक गीत के लिए हार्दिक बधाई आदरणीय प्रदीप कुमार कुशवाहा जी 

Comment by Dr.Ajay Khare on April 2, 2013 at 11:43am

adarniy kushwaha ji vyang teekha v gahra tha badhai


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on April 2, 2013 at 10:52am

आज जनता भोली-भाली तो नहीं, पर तंद्रा में अवश्य है, तभी तो कतिपय नेता जन अपने  उन्हीं पुराने वायदों के खोखलेपन के कई सबूत देने के बाद भी सत्ता में आते रहते हैं..

इस सामयिक गीत के लिए हार्दिक बधाई आदरणीय प्रदीप कुमार कुशवाहा जी 

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