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तुझ बिन जिंदगी हमसे, कुछ ऐसे फिसल रही है ,
ज्यों कतरा कतरा जान, हर दम निकल रही है .

हर आहट पे तू आया, गफलत मुझे सताती ,
ख्वाबों से घायल नींदें , हर पल संभल रही है .

तुझे बेवफा जो कहते, वो लोग हैं बहुत से ,
लोगों को तू दिखा दे, वो वफ़ा मचल रही है .
.
मैं जानता हूँ जानम , तेरी मजबूरियों को ,
तू एक बार आ जा, मेरी सांसें उछल रही है .

~ डा अजय कुमार शर्मा

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Comment by Dr Ajay Kumar Sharma on January 7, 2012 at 10:40am

धन्यवाद  गणेश  जी " बागी " जी , अरुण कुमार पाण्डेय " अभिनव " जी ....आभार आपके आशीर्वाद का .. :)


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on January 6, 2012 at 9:24pm

शानदार अभिव्यक्ति पर बधाई स्वीकार करे, जैसा की अरुण जी ने कहा उक्त पक्तियां सच में अच्छी लगीं |

Comment by Abhinav Arun on January 6, 2012 at 8:43am

bahut achchhi rachna ke hardik badhai sweekaren yah panktiyaan behatareen lagin -

हर आहट पे तू आया, गफलत मुझे सताती ,
ख्वाबों से घायल नींदें , हर पल संभल रही है .

badhai aapko !!

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