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Kavita vikas's Blog (4)

जिजीविषा

वसंत का मधुरस टिकता नहीं

पीयूष सावन का क्षणिक है
समय का प्रवाह रुकता नहीं
सुख का सागर  भी तनिक है ।
दिवसावसान की रक्तिमा देखो
जीवन का गूढ़ तत्व बतलाता है
एक - एक क्षण  पकड़ कर रखो
पर रेत सा मुट्ठी से फिसल जाता है ।
जिजीविषा बनी रहे चंद साँसों में
जिंदगी गुजर रही मेरे सामने से
उन्माद कम न हो देदीप्यमान आसों में
कुछ और…
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Added by kavita vikas on April 29, 2012 at 12:00pm — 3 Comments

मेरी जिंदगी

मेरी जिंदगी एक खुली किताब है

हर पन्ने पे तेरा नाम है ।

मैं रहूँ न रहूँ ,परवाह नहीं है

जिंदगी मेरी तुम्हारे नाम है ।

 

जब कभी ख्यालों की आँधी उठेगी

तन्हाई में मेरी आवाज़ गूँजेगी

परछाईं बनकर…

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Added by kavita vikas on March 19, 2012 at 10:00pm — 5 Comments

वक़्त का वज़ूद

वक़्त का वज़ूद

वक़्त की बेलगाम रफ़्तार का वज़ूद

दिखता है चेहरे की गहराती लकीरों में

या मिलता है जीवन की भूलभुलैया में

स्नेहसिक्त माँ की आँचल में मौज़ूद

है अब भी मेरे होने की महक

सन्नाटों में गूँजती है मेरी चहक ।

चलती थी एक गुड़िया उँगलियों को थामे

उन काँपती बेजान हाथों की नरमी

और छुपी उनमे उनके नेह की गरम

उन्हीं थापों से बीतती हैं रातें ,हँसती है शामें ।

चराचर का भेद समझा जब ज्ञानदीप से

जीवन को गुज़रता देखा सामने से

अतीत के गर्त में…

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Added by kavita vikas on March 2, 2012 at 7:34pm — 6 Comments

कामनाएँ

कामनाएँ

साल दर साल रैन बसेरा के साथ मत दो

बस एक ख्याल ही अपना आने दो ।

गगन के विस्तार सा आयाम मत दो

बस एक कोने में सिमटा सूर्य बन रहने दो ।

सावन की हरियाली सा संजीवनी अहसास मत दो

बस एक अमलतास बन मुस्काने दो ।

सर्द रातों में बाहों के घेरे का जकड़न मत दो

बस टिकने के लिए कंधे का सहारा दे दो ।

आँखों में बंद ख्वाबों का आसरा मत दो

बस अपनी एक बेचैन पल का हवाला दे दो ।

दूब की मखमली चादर पर साथ न चलने दो

बस ओस की एक बूँद बन गिर जाने…

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Added by kavita vikas on February 1, 2012 at 10:25pm — 3 Comments

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