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rakesh naraian's Discussions (6)

Discussions Replied To (5) Replies Latest Activity

"घावों को जो सहला दे दर्द को जो सहने की ताक़त दे सबदो को जो गूँज दे म्न को जो सुकून द…"

rakesh naraian replied May 2, 2010 to kavita ke bare

7 May 2, 2010
Reply by rakesh naraian

"कविता एन सबसे तटस्थ रह कर केवल एक ठंडी चाव है तपते मरुस्थल की उष्मा को सहने की ताक़त…"

rakesh naraian replied May 2, 2010 to kavita ke bare

7 May 2, 2010
Reply by rakesh naraian

"कविता सबदो के माध्यम से ,अनुभव को चित्रित करने का एक सलीका है ..तथ्यों को भोगने के ब…"

rakesh naraian replied May 2, 2010 to kavita ke bare

7 May 2, 2010
Reply by rakesh naraian

"sabdo ki anugunj mein kavita hai ..... sabdo ke bhitr chipi raag ko sangeet jo de wo…"

rakesh naraian replied May 2, 2010 to kavita ke bare

7 May 2, 2010
Reply by rakesh naraian

"जानना पहिचानना फिर चाहना फिर अपेक्षाएं करना निराश होना लड़ना ,झगड़ना क्रोध ,अहंकार के…"

rakesh naraian replied May 2, 2010 to आईये पढ़े और लिखे ख्यातिप्राप्त रचनाकारो की कुछ रचनाये...

39 Aug 24, 2013
Reply by आशीष नैथानी 'सलिल'

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"आदरणीय जगदानन्द झा मनु जी, अहाँ बड्ड नीक गजल पठेलियै. सबसे पहिल, त हम प्रयुक्त भेल बहरक विषय में…"
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"आदरणीय रोहित डोबरियाल "मल्हार" जी, आपकी भावुक प्रस्तुतीकरण का स्वागत है.  आप…"
Aug 3

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"  निर्निमेष आँखों की प्रतीक्षा उत्कट तीव्रता के साथ शाब्दिक हुई है, आदरणीय विजय निकोर…"
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"वाह वाह वाह .. सावन की कजरी का आधुनिक रूप गुदगुदा गया, आदरणीय आशीष जी.  सही भी है, प्रकृति के…"
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आशीष यादव replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय श्री अशोक कुमार जी इस कजरी पर टिप्पणी के लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद।  आज के परिवेश…"
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Ashok Kumar Raktale replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय आशीष यादव जी सादर, सावन की सुंदर और मधुर  फुहारों में यह कजरी की प्रस्तुति  बहुत…"
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vijay nikore posted a blog post

सांकल मन के द्वार पर

सांकल मन के द्वार परजब-जब जहाँ कहीं फूल खिलेयाद तुझे किया था हमने ...कहती थी न ..."क्या...तुम्हारे…See More
Jul 27

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