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दोहा -चुनाव (प्रदीप कुमार सिंह कुशवाहा)

नारी नेता जीव दो, लीला अपरम्पार
नेता देश उजाड़ते, रचती घर को नार

नेता हमको चाहिए, बूझे जन की बात
सूरज बन चमका करे, दिन हो या फिर रात

वोट जरूरी है बहुत, देना सोच विचार
निर्भय हो मत डालना, जन्म-सिद्ध अधिकार

धर्म-कर्म के नाम पर, मत डालो तुम वोट
गरल बहुत हम पी चुके, रहे न कोई खोट

सात बजे से शुरू हो, छः पर होता अंत
कार्य करें सब समय से, रखते गुण यह संत

साथ-साथ हम सब चलें, पावन यह त्यौहार
योग्य व्यक्ति को ही चुनें, हो स्थिर नव-सरकार

लाइन लंबी देखकर, लौट न आना भ्रात
बहुत जरूरी दान ये, होगा नया प्रभात

प्रदीप कुमार सिंह कुशवाहा
मौलिक / अप्रकाशित
२०.०४.२०१४

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Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on May 2, 2014 at 3:32pm

आदरणीय श्री सौरभ जी 

सादर 

फिर प्रयास जारी, आपकी अपेक्षाओं पर खरा उतरने हेतु . 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on May 2, 2014 at 1:47am

आपके दोहे कथ्य और शिल्प के पटल पर सटीक सधे हुए हैं, आदरणीय प्रदीपजी.

इस गहन अभ्यास के लिए दिल से शुभकामनाएँ और सादर बधाइयाँ.

सादर

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on May 1, 2014 at 11:55am

आदरणीया प्राची जी 

सादर 

अब सीखने  की प्रक्रिया में आया हूँ. 

मार्ग प्रशस्त करते रहिये. 

तकनीकी जानकारी कहाँ मिलेगी ? सादर 

आभार 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on April 30, 2014 at 7:28pm

मतदान को प्रेरित करते सुन्दर सार्थक दोहे आ० प्रदीप कुशवाहा जी 

सात बजे से शुरू हो, छः पर होता अंत ................................हो शुरू ( विषम चरण का अंत १२ से होना चाहिए यहाँ २२ हो रहा है)
कार्य करें सब समय से, रखते गुण यह संत.........................वक्त से( यहाँ भी वाचन में स्वर भार अंत में २२ बन रहा है; इसलिए समय को वक़्त कर लेने पर १२ से विषम चरण का अंत प्रवाह को निर्बाध रखेगा)

साथक प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई 

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on April 23, 2014 at 2:31pm

स्नेही जीत जी 

सादर 

प्रोत्साहन हेतु आभार 

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on April 23, 2014 at 2:31pm

आदरणीय श्री सत्य नारायण जी 

सादर 

प्रोत्साहन हेतु आभार 

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on April 23, 2014 at 2:30pm

आदरणीय श्री भंडारी जी 

सादर 

प्रोत्साहन हेतु आभार 

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on April 23, 2014 at 2:29pm

आदरणीया कल्पना जी 

सादर 

प्रोत्साहन हेतु आभार 

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on April 23, 2014 at 2:28pm

सादर आभार 

आदरणीय श्री श्याम नारायण वर्मा जी 

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on April 23, 2014 at 2:28pm

आदरणीय श्री ब्रजेश जी 

सादर 

आपकी प्रसन्नता ही मेरी सफलता की सीढी है. 

प्रोत्साहन हेतु आभार 

कृपया ध्यान दे...

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