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मेरे खोये हुये लम्हात के ग़म को,

हकीकत के सीने में दफ़्न,

कुछ इच्छाओं की

उन धुँधली यादों को,

मेरे सपनों की लाशों को,

अब तक ढो रहा हूँ मैं…

 

कई दफे

ज़िन्दगी करीब से गुज़री,

मगर,

मैं ही जी न पाया..

आज मुझे लगता है

मैंने बहुत कुछ खो दिया,

पहले जो खोया है..

उसे याद कर,

और फिर,

उन्हीं यादों में खोकर,

 

एक लम्बा सफर तय किया,

मगर,

आज मुझे लगा

कि मैं वहीं हूँ!

वहीं हूँ जहाँ से चला था……

 

-मौलिक व अप्रकाशित

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सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on January 10, 2014 at 8:21pm

आदरणीया डॉ प्राची जी आपके शब्दों से बहुत हौसला मिला है आपका बहुत बहुत शुक्रिया


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on January 10, 2014 at 10:07am

कई दफे

ज़िन्दगी करीब से गुज़री,

मगर,

मैं ही जी न पाया..

आज मुझे लगता है

मैंने बहुत कुछ खो दिया,

पहले जो खोया है..

उसे याद कर,

और फिर,

उन्हीं यादों में खोकर....................सुन्दर आत्म मंथन करती रचना 

शुभकामनाएं 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on January 9, 2014 at 9:42pm

बहुत बहुत शुक्रिया आपका स्नेह बना रहे


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on January 9, 2014 at 12:34am

बधाई.. .

लिखते रहिये.. . शुभ-शुभ


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on January 5, 2014 at 8:46pm

आदरणीया अन्नपूर्णा जी बहुत बहुत धन्यवाद आपका

Comment by annapurna bajpai on January 5, 2014 at 8:22pm

सुंदर रचना , बधाई आपको आ0 शिजू जी । 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on January 5, 2014 at 8:21pm

आदरणीय बृजेशजी आपका बहुत बहुत धन्यवाद

Comment by बृजेश नीरज on January 4, 2014 at 11:44pm

वाह! गज़ब! बहुत ही सुन्दर रचना! आपको हार्दिक बधाई!


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on January 4, 2014 at 7:48pm

भाई अरुणजी आपका बहुत बहुत शुक्रिया


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on January 4, 2014 at 7:47pm

आदरणीय सुजीत जी आपका आभार

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