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हम भी कारोबार करें

मिल कर आँखे चार करें
आजा रानी, प्यार करें

जग पर तम गहराया है
भेद इसे, उजियार करें

कैसे  कैसे लोग  यहाँ           
छुपछुप  पापाचार करें

नया पैंतरा दिल्ली का
भोजन का अधिकार करें

लीडर तेरा क्या होगा
वोटर जब यलगार करें

चलो यहाँ से  'अलबेला'
हम भी  कारोबार  करें

-अलबेला खत्री
मौलिक / अप्रकाशित

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Comment by Ashish Srivastava on August 27, 2013 at 10:59am

नया पैंतरा दिल्ली का 
भोजन का अधिकार करें

बहूत सुन्दर रचना, सीखने को बी मिला , 

Comment by Albela Khatri on August 27, 2013 at 8:11am

धन्यवाद आदरणीय गिरिराज भंडारी जी,  आपके शब्द उत्साहवर्धक  हैं


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on August 27, 2013 at 7:43am

अलबेला जी , अच्छी गज़ल हुई !! वर्तमान स्थिति पर ये शे र अच्छे लगे !!

कैसे  कैसे लोग  यहाँ           
छुपछुप  पापाचार करें

नया पैंतरा दिल्ली का
भोजन का अधिकार करें

लीडर तेरा क्या होगा
वोटर जब यलगार करें----------- बधाई !!

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