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खास आपके लिए
लाया मैं मिठा सपना
क्या मैं इस योग्य हूँ
मुझे अब तक नहीं पता
इस बात का कि
मैं ला सकता हूँ
आपके लिए मीठा सपना।

लोग कहते हैं मुझको
कि मैं नहीं हूँ योग्य
किसी के लिए कुछ भी
मीठा ला सकने में
ला सकता हूँ मैं सिर्फ
कङवा ही कङवा।

पहली बार लाया था मैं
बङा ही मन लगाकर
किसी अपने के लिए
एक मनपसन्द चीज
मेरे ख्याल से
नहीं पूछा था उसको
कि क्या है उसका मनपसन्द।

देखकर इतना गुस्सा हुआ
मेरा प्रियतम मुझसे रूठा
ला दी थी मैंने
उसकी सबसे घृणित चीज
इसलिए जब भी लाता हूँ
किसी अपने के लिए
कोई खास चीज
डरने लगता हूँ मैं मन में
कहीं निकल ना जाए
वो कङवी और घृणित चीज।

खास आपके लिए
अब जब भी लाता हूँ
कोई खास चीज
तो पूछ लेता हूँ पहले
आपकी मनपसन्द चीज
क्योंकि डरता हूँ अपने मन में
खास आपके लिए
लाई गयी खास चीज
दूर ना कर दे आपको मुझसे
पहले की तरह हमेशा की तरह।

- सतवीर वर्मा 'बिरकाळी'
08485851448
(पूर्णतः मौलिक और अप्रकाशित)

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Comment by सतवीर वर्मा 'बिरकाळी' on March 3, 2013 at 8:29pm
रचना पर अपने हस्ताक्षर करने के लिए शुक्रिया किशन जी।
Comment by सतवीर वर्मा 'बिरकाळी' on March 3, 2013 at 8:10pm
रचना पर सार्थक टिप्पणी के लिए शुक्रिया डॉ॰ प्राची सिंह जी। इसी तरह हमारे हौंसले रुपी गमले को सींचती रहें।
Comment by सतवीर वर्मा 'बिरकाळी' on March 3, 2013 at 8:04pm
पीठ थपथपाने के लिए धन्यवाद रविकर जी। आपके मार्गदर्शन में हमें बहुत कुछ सीखने को मिलेगा।
Comment by सतवीर वर्मा 'बिरकाळी' on March 3, 2013 at 7:48pm
आपकी सार्थक और प्रोत्साहन करने वाली टिप्पणी के लिए धन्यवाद राजेन्द्र कुमार जी। अभी तो मैं दो पत्तों वाला पौधा हूँ जिसने साहित्य रुपी वसुन्धरा के बाहर थोङा सा सर निकाला है। आप जैसे उच्च कोटि के साहित्यकारों की संगत में रहकर सार्थक टिप्पणी रुपी खाद पानी मिलने पर पौधा भी रचना क्षेत्र में परिपक्व होता जाएगा।

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on March 1, 2013 at 3:46pm

 तोहफों के चयन के लिए मन में व्याप्त डर को बढ़िया अभिव्यक्त किया है..बधाई 

Comment by रविकर on March 1, 2013 at 3:40pm

बिलकुल भाई-
बढ़िया प्रस्तुति -
शुभकामनायें-

Comment by राजेश 'मृदु' on March 1, 2013 at 11:22am

पहली बार इस पटल पर आपकी रचना पढ़ते हुए जिसकी उम्‍मीद थी वह बात नहीं हुई, मन थोड़ा कसमसाया कि ऐसा कैसे हो सकता है पर पूरी रचना पढ़ते-पढ़ते आश्‍वस्ति गहरे उतर गई, आशा है यह आश्‍वस्ति आगे भी आप देते रहेंगें और मैं पाठक उसको समेटे मीठे सपने को बिना किसी कड़वाहट के स्‍वीकार एवं अंगीकार करता रहूंगा । हार्दिक बधाई इस सुंदर रचना पर

Comment by सतवीर वर्मा 'बिरकाळी' on February 28, 2013 at 7:38pm
शुक्रिया श्याम नारायण वर्मा जी और पवन अम्बा जी। आपकी हौंसला अफजाई से हमारी रचनाशीलता और परिपक्व होगी।
Comment by pawan amba on February 28, 2013 at 5:40pm

achha hai...

Comment by Shyam Narain Verma on February 28, 2013 at 5:10pm

KYA BAT HAI.....

 

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