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इंतज़ार........
हम आज भी तेरे जाने के बाद, तेरे कदमो के निशाँ पे सर रख के सजदा करते हैं I
जो आँख तेरे आने पे झपकना भूल जाती थी, और एकटक निहारा करती थी तुम्हें
वही आँखें अब तेरे कदमों की छाप पर टिकी इंतज़ार करती हैं,
कि कब ये निशाँ वापस मेरी ओर लौट कर आयेंगे....
कान हर पल तेरी आहात को सुनने के लिए बेताब रहते हैं,
दिल-ओ-दिमाग हर वक़्त हर वक़्त तेरे ख़यालों में गुम सा रहता है,
दिल हर घडी बेचैन सा और हर धड़कन तुझसे मिलने को बेकरार सी रहती है 
ये आँखें तब भी नहीं झपकती थीं, ये आँखें आज भी नहीं झपकती हैं....
ये वही आंखें हैं जो हर पल तेरे ख़ाब देखा करती थीं  
पक्लों के गिरने उठने पर हर बार एक नया ख़ाब सजाया करती थीं  i
वही आँखें आज जब झपकती हैं, तो अपने कोरों से कुछ बूंदें
मेरे गालों पे ढलका जाती हैं...........
उन बूंदों के गर्म एहसास से अचानक, फिर मेरी आँखें झपकना भूल जाती हैं
और टिक जाती हैं तुम्हारी क़दमों कि छाप पर इस इंतज़ार में
कि आज नहीं तो कल ये क़दमों के निशाँ मेरी ओर ज़रूर वापस लौट कर आयेंगे.....
हम आज भी तेरे जाने के बाद तेरे कदमों पे सर रख के सजदा करते हैं i
                                                                                                            मोनिका जैन "डौली"
 


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Comment by UMASHANKER MISHRA on June 11, 2012 at 11:30pm

गम से भरी रचना ......

आज नहीं तो कल ये क़दमों के निशाँ मेरी ओर ज़रूर वापस लौट कर आयेंगे.....
हम आज भी तेरे जाने के बाद तेरे कदमों पे सर रख के सजदा करते हैं i

प्यार की भक्ति की चरम सीमा..... बहुत सुन्दर रचना

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on June 11, 2012 at 10:30am

तुम पुकार लो  , तुम्हारा इन्तजार है 

कितना सुन्दर सलोना इजहार है 

थक गयी आँखे उनके इन्तजार में 

न सूखे अश्क न पलकें थमी 

कितना अनोखा दिलवर का प्यार है 

आदरणीय मोनिका जी, सादर , बधाई 

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