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Pooja Singh's Blog (8)

शिक्षा (लेख)

शिक्षा का हमारे दैनिक, नैतिक, सामाजिक, व्यावहारिक तथा व्यावसायिक जीवन में बहुत बड़ा महत्व है | जब से मानव सभ्यता विकसित हुई है , तभी से हमारे जीवन में शिक्षा का बहुत बड़ा योगदान रहा है | वैदिक काल में गुरुकुल के माध्यम से शिक्षा प्रदान की जाती थी तथा गुरु शिष्य परम्परा बनाये रखने के लिए दीक्षांत समारोह का आयोजन किया जाता था | जिसमे शिष्य गुरु को गुरु दक्षिणा देता था | पहले वेदों, पुराणों, शास्त्र ग्रंथो तथा राजनीती शास्त्र, तर्क विज्ञान, की शिक्षा दी जाती थी | लेकिन जैसे - जैसे समय बदलता गया… Continue

Added by Pooja Singh on October 25, 2010 at 3:30pm — 3 Comments

बहुत सफल और सार्थक आराधना "जय माता की"

शक्ति की आराधना का पर्व आरंभ हो चुका है. नव दिन तक हम माँ की पूजा अर्चना करेंगे. हमारे यहाँ कन्या को भी देवी के रूप में माना जाता है और इसी लिए हम नवरात्रा के अंतिम दिन कन्या पूजन करने के बाद ही पर्व समाप्त करते हैं, किंतु यह आश्चर्य और दुख की बात है कि जो समाज कन्याओं को देवियों के रूप में पूजता है वही समाज कन्या भ्रूण हत्या का भी अपराधी बनता जा रहा है.



आइए इस पर्व पर हम सब माँ दुर्गा की सौगंध खा कर यह संकल्प लें कि हम ना तो अपने परिवार में कन्या भ्रूण हत्या के दोषी बनेगे और ना ही… Continue

Added by Pooja Singh on October 9, 2010 at 12:30am — 4 Comments

दहेज दानव

दहेज का दानव बहुत बड़ा है

मुँह विकराल किये खड़ा है ,

कितना भी रोको नही रुकता यह,

रक्तबीज जैसा अपना आकार किया,

पिताओं की पगड़ी इसने उछाली है,

बेटियों के अरमानो को तार तार किया,

कई बेटियों को इस दानव ने जला दिया,

ताने सुन सुन कर जीना हुआ मुहाल,

जो बेटी दहेज न लेकर आई ससुराल,

उस बेटी का क्या था कसूर,

मारकर घर से उसे निकाल दिया,

कैसी परंपरा जो है सब मजबूर,

देश के युवा अब करो कुछ तुम्ही उपाय,

दहेज दानव जल्द से जल्द मारा… Continue

Added by Pooja Singh on September 26, 2010 at 8:30am — 4 Comments

उम्रे तमाम

उम्रे तमाम गुजारी तो क्या किया

इस जीवन से तूने क्या लिया |

इस जीवन को तूने क्या दिया

उम्रे तमाम गुजारी तो क्या किया |

ता उम्र तू रहा इस कदर बेखबर

रही न तुझे अपनी जमीर की खबर |

करता रहा तू मनमानी अपनी

रही न तुझे वक्त की खबर

उम्रे तमाम गुजारी तो क्या किया |

करता रहा तू मेरा - मेरा

नही है , यहा कुछ तेरा - मेरा |

उम्रे तमाम गुजारी तो क्या किया

मनुष्य जन्म तुझे है , किसलिए मिला

इस जन्म को किया क्या सार्थक तूने |

उम्रे तमाम गुजारी… Continue

Added by Pooja Singh on September 21, 2010 at 9:35am — 2 Comments

कलयुगी मानव

देखो,
यह कलयुगी मानव,
कैसा है ?
यह कलयुगी मानव !
जिसका जीवन यंत्रो जैसा,
आखो में लालच है,
लालच इसकी न चेहरे पर भाव !
झूठ इसकी है बुनियाद !
बईमानी इसकी है आदत !
धोखा इसका है स्वभाव !
हर पल में इसका अभिनय बनता,
बातो में इसके छलावा पन !
हर पल में नया चरित्र है बनता !
देख कर अवसर वार यह करता !
रहता हरदम चोक्न्ना देखो,
यह कलियुगी मानव !
कैसा है ?
यह कलयुगी मानव !!

Added by Pooja Singh on September 18, 2010 at 1:00pm — 1 Comment

मानवाधिकार

मानवाधिकार का क्या मतलब है ! मानवाधिकार दो शब्दों से मिलकर बना है, मानव + अधिकार अर्थात मानव से सम्बन्धित अधिकार ! मानवाधिकार के अन्तर्गत वे सब अधिकार मानव को प्राप्त है , जिसका वह स्वतंत्र रूप से अधिकारी है ! आज के इस बदलते परिवेश में जहा मानव मूल्यों का हास हो रहा है ! वहा मानवाधिकारों का हनन होता जा रहा है ! चाहे वह सरकार के प्रशासन में जेल में कैदियों के साथ व्यवहार हो , समाज में फैली अनैतिकता , या फिर घरेलू हिंसा हो हर जगह पर मनुष्य के अधिकारों का हनन हो रहा है ! आज भारत के आजादी के ६ दशक… Continue

Added by Pooja Singh on September 17, 2010 at 1:58pm — 2 Comments

जिन्दगी

फूलो की बहार है जिन्दगी,

काटो भरी सफर है जिन्दगी,

है जिन्दगी पर एक मकाम है यह जिन्दगी !

ये जिन्दगी एक अनकही पहेली है ,

जो समझ के भी समझ में न आये ,

ये जिन्दगी है, अनकही जिन्दगी !!

यह जिन्दगी है ,

सुबह से शाम है,

यह जिन्दगी हर एक नई सुबह है ,

यह जिन्दगी !



जिन्दगी जीने का नाम है ,

जीने की चाहत है ,

जिन्दगी हर दिन एक नया पैगाम है,

यह जिन्दगी !

इस जिन्दगी के सफर में,

जो पीछे छुट गया वह नही मिलता है ,

जो मिलता है,… Continue

Added by Pooja Singh on September 16, 2010 at 11:00am — 3 Comments

हिन्दी दिवस

आज हिन्दी दिवस है . लेकिन क्या हम सही मायने में हिन्दी को वो सम्मान दे पा रहे है जो चाहिये, आज हिन्दी केवल कहने मात्र की राष्ट्र भाषा रह गई है | आज के युग में जहाँ हर तरफ पश्चिमी सभ्यता का चलन है इसलिये हमे हिन्दी का अस्तित्व बचाने के लिए बहुत प्रयास करना होगा तभी हिन्दी की गरिमा बच सकेगी और हिन्दी सही मायने में भारत की राष्ट्र भाषा बन सकेगी |
जय हिंद |

Added by Pooja Singh on September 14, 2010 at 5:30pm — 2 Comments

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