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Priyanka Tripathi
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Priyanka Tripathi's Blog

हर रूप में हर रंग में

हर रूप में हर रंग में,

कभी दूर से कभी संग में

अकेले कमरा-बंद में ,

कभी भीड़ के हडकंप में

 

तपते आँगन में नंगे पाँव से,

कभी पीपल की ठंडी छांव से

हकीक़त कि कम्पित नाव से,

कभी सपनों के रेशमी गांव से

 

नदिया कि बहती धार पे,

कभी क्षितिज के उस पार पे

पेड़ों कि हिलती डार पे,

कभी वीणा कि झंकृत तार पे

 

दूर चाँद के मुस्कुराने पर,

कभी दिन में आंसू बहाने पर

फूलों के खिलखिलाने…

Continue

Posted on May 25, 2013 at 1:00pm — 15 Comments

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At 1:09am on May 25, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार की ओर से आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें....... 

At 8:10am on June 19, 2013, D P Mathur said…

जीवन के झिलमिल कोणों को,
इस राह के अगणित मोडों को,
लम्हों के सारे जोड़ों को,
हमने पल पल देखा है !
अति सुन्दर !!! आपको बधाई !

At 7:33am on May 31, 2013, dinesh solanki said…

अनुभवशीलता का अद्भुत सुन्दर और रमणीय वर्णन ...बधाई 

At 2:43pm on May 25, 2013, Abhinav Arun said…

हार्दिक  शब्दों के इन्द्रधनुषी मंच पर आदरणीय।  आपका !

At 1:09pm on May 25, 2013, बृजेश नीरज said…

इस मंच पर आपका स्वागत है!

 
 
 

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"आ. भाई नीलेश जी, सादर अभिवादन। अच्छी गजल हुई है। हार्दिक बधाई।"
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TEJ VEER SINGH replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-107 (विषय: इंसानियत)
"हार्दिक आभार आदरणीय प्रतिभा जी।"
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TEJ VEER SINGH replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-107 (विषय: इंसानियत)
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