For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

चाँद बादल में छुपा [नज़्म]

चाँद बादल में छुपा,  परछाइयाँ भी खो गयीं ।
साथ मेरा छोड़ कर , तनहाइयाँ भी सो गयीं ।

चुप्पियों की बाढ़ आयी , सारे मेले बह गये ।
महफ़िलों की गोद में भी , हम अकेले रह गये ।

खामोश मेरे हाल पर , खामोशियाँ भी हो गयीं ।
साथ मेरा छोड़ कर , तनहाइयाँ भी सो गयीं ।

अब तो कोई दर्द कोई गम भी बाकी ना रहा ।
मेरी इस आवारगी का , कोई साथी ना रहा ।

चैन तो ना मिल सका बेचैनियाँ भी खो गयीं ।
साथ मेरा छोड़ कर तनहाइयाँ भी सो गयीं ।

क्या करेंगे हम किसी से, कोई रिश्ता जोड़कर ।
लो अँधेरे में गया ,साया भी हमको छोड़कर ।

आँखों में जो छायी रहीं, रंगीनियाँ भी खो गयीं ।
साथ मेरा छोड़ कर, तनहाइयाँ भी सो गयीं ।

नीरज

Views: 1453

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by shalini kaushik on May 21, 2013 at 12:57am
बहुत सुन्दर भावनात्मक अभिव्यक्ति
Comment by Neeraj Nishchal on May 20, 2013 at 4:58pm

सौरभ पाण्डेय जी बहुत बहुत धन्यवाद

Comment by Neeraj Nishchal on May 20, 2013 at 4:57pm

अभिनव अरुण साहब हार्दिक अभिनन्दन

Comment by Abhinav Arun on May 20, 2013 at 3:37pm

क्या करेंगे हम किसी से, कोई रिश्ता जोड़कर ।
लो अँधेरे में गया ,साया भी हमको छोड़कर ।

बहुत सुन्दर नज़्म कही है आपने हार्दिक बधाई  !!


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on May 20, 2013 at 2:01pm

आपका प्रयास अच्छा है.. आप अपनाये गये बह्र के वज़्न को लिख दें, यह उचित होगा. 

निम्नलिखित मिसरे देख लें.. 

खामोश मेरे हाल पर , खामोशियाँ भी हो गयीं   और   आँखों में जो छायी रहीं, रंगीनियाँ भी खो गयीं

एक सुझाव : सीखने का दौर है, रचनाओं/ ग़ज़ल/ नज़्म के साथ फोटो-पिक्चर आदि नत्थी करने के चोंचलों में न पड़ा करें.

शुभेच्छाएँ

 

Comment by राजेश 'मृदु' on May 20, 2013 at 1:10pm

नज्‍म तक तो ठीक है लेकिन उसके साथ ये एड किसलिए, एक के साथ एक मुफ़त का ऑफर तो नहीं चल रहा है यहां

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदरणीय अशोक भाईजी धन्यवाद ... मेरा प्रयास  सफल हुआ।"
4 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"वाह वाह वाह !!! बहुत दिनों बाद ऐसी लाजवाब प्रतिक्रिया पढने में आई है। कांउटर अटैक ॥ हजारों धन्यवाद…"
4 hours ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"  आदरणीय शेख शाहज़ाद उस्मानी जी सादर, सरकारी शालाओं की गलत परम्परा की ओर ध्यान आकृष्ट कराती…"
4 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"सार्थक है आपका सुझाव "
4 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदाब।‌ रचना पटल पर उपस्थिति और समीक्षाओं हेतु हार्दिक धन्यवाद आदरणीया प्रतिभा पाण्डेय जी। मेरी…"
4 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"हार्दिक धन्यवाद आदरणीया प्रतिभाजी ।  इसमें कुछ कमी हो सकती है लेकिन इस प्रकार के आयोजन शहरों…"
5 hours ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव साहब सादर, बिना सोचे बोलने के परिणाम पर सुन्दर और संतुलित लघुकथा…"
5 hours ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"अमराई में उत्सव छाया,कोयल को न्यौता भिजवाया। मौसम बदले कपड़े -लत्ते, लगे झूमने पत्ते-…"
5 hours ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"ठण्ड गई तो फागुन आया। जन मानस में खुशियाँ लाया॥ आम  लगे सब हैं बौराने। पंछी गाते सुर में…"
5 hours ago
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"लघुकथा किसी विसंगति से उभरती है और अपने पीछे पाठको के पीछे एक प्रश्न छोड़ जाती है। सबकुछ खुलकर…"
5 hours ago
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदरणीय अखिलेश जी स्वयं के प्रचार प्रसार के लिए इस तरह के प्रायोजित कार्यक्रमों का चलन साहित्य और…"
6 hours ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"  जी ! //हापुस लँगड़ा नीलम केसर। आम सफेदा चौसा उस पर।।//... कुछ इस तरह किया जा सकता है.…"
6 hours ago

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service