मनुष्य और भाषा के बीच का संबंध केवल अभिव्यक्ति का नहीं है, अगर ध्यान से सोचें तो यह एक तरह का खेल है जिसकी व्याख्या खेल सिद्धांत के आधार पर की जा सकती है। खेल सिद्धांत हमें सिखाता है कि जब दो या अधिक खिलाड़ी किसी स्थिति में निर्णय लेते हैं, तो हमेशा सत्य या सही को नहीं चुनते, बल्कि वह विकल्प चुनते…
दावतनामा हमको आया एक मुशायरे में शिरकत काजिस में अपनी शायरी पढ़ना बाइस था बेहद इज़्ज़त काकिया इरादा हमने उसी दिन ग़ज़लें पुरानी नहीं पढ़ेंगेजाएंगे उस महफ़िल में तो ताज़ा सुख़न ही पेश करेंगेनई ग़ज़ल लिखने की ठानी भूल के सारे काम थे जितनेकलम दवात रजिस्टर लेकर बैठ गए हम मतला लिखनेबैठे रहे घंटों कुर्सी पर अपना…
कुंडलिया. . . . बेटीबेटी से बेटा भला, कहने की है बात । बेटा सुख का सारथी, सुता सहे आघात ।।सुता सहे आघात, पराई हरदम रहती ।जीवन के वह दर्द, सदा ही चुप - चुप सहती ।।जाने कितने रूप,सुता यह ओढ़े लेटी ।सृष्टि सृजन आधार, मगर है मानो बेटी ।।सुशील सरना / 20-1-26मौलिक…
मकर संक्रांति के अवसर परदोहा एकादश . . . . पतंगआवारा मदमस्त सी, नभ में उड़े पतंग । बीच पतंगों के लगे, अद्भुत दम्भी जंग ।।बंधी डोर से प्यार की, उड़ती मस्त पतंग ।आसमान को चूमते, छैल-छबीले रंग ।।कभी उलझ कर लाल से, लेती वो प्रतिशोध ।डोर- डोर की रार का, मन्द न होता क्रोध ।।नीले अम्बर में सजे, हर मजहब के…
जिस-जिस की सामर्थ्य रही है धौंस उसी की एक सदा से एक कहावत रही चलन में भैंस उसीकी जिसकी लाठी मनमर्जी थोपी जाती है नहीं चली तो तोड़ें काठी अहंकार मद भरे विचारों उड़ें हवा में वे गर्दा से .. हठ में अड़ना, जबरन भिड़ना और झूठ रच मन की करना निर्बल अबलों या नन्हों में नाहक वीर बने घुस लड़ना मद में…
कुंडलिया. . . .किसने समझा आज तक, मुफलिस का संसार ।आँखें उसकी वेदना, नित्य करें साकार ।।नित्य करें साकार , दर्द यह कहा न जाता ।उसे भूख का दंश , सदा ही बड़ा सताता ।।पत्थर पर ही पीठ , टिकाई हरदम इसने ।भूखी काली रात , भाग्य में लिख दी किसने ।।सुशील सरना /…
ग़ज़ल2122 2122 212 कितने काँटे कितने कंकर हो गयेहर गली जैसे सुख़नवर हो गये रास्तों पर तीरगी है आज भीशह्र-से जब गाँव के घर हो गये आत्मनिर्भर हो रहे थे ही कि वेहुक्म आया घर से बेघर हो गये जो गिरी तो साख गिरती ही गईअच्छे खासे नोट चिल्लर हो गये सहमी-सहमी हर…
दोहा पंचक. . . . क्रोधमानव हरदम क्रोध में, लेता है प्रतिशोध । सही गलत का फिर उसे, कब रहता है बोध ।।बड़े भयानक क्रोध के, होते हैं परिणाम । बदले के अंगार को, मिलता नहीं विराम ।।हर लेता इंसान का, क्रोधी सदा विवेक । मिटते इसके ज्वाल में, रिश्ते मधुर अनेक ।क्रोध अनल में आदमी, कर जाता वह काम । घातक…
२२१/२१२१/१२२१/२१२ * ता-उम्र जिसने सत्य को देखा नहीं कभी मत उसको बोल पक्ष में बोला नहीं कभी।१। * भूले हैं सिर्फ लोग न सच को निहारना हमने भी सच है सत्य पे सोचा नहीं कभी।२। * आदत पड़ी हो झूठ की जब राजनीति को दिखता है सच, जबान पे आता नहीं कभी।३। * बस्ती में सच की झूठ को मिलता है ठौर पर सच को…
तारों भरी रात, फैल रही चाँदनीइठलाता पवन, मतवाला पवनतरू तरु के पात-पात परउमढ़-उमढ़ रहा उल्लासमेरा मन क्यूँ उन्मनक्यूँ इतना उदास खुशी ... पिघलती हुई मोम-सीजाने क्यूँ उसे हमेशाहोती है जाने की जल्दीआती है, चली जाती हैआ..ती है आलोप हो जाती है कोई टुकड़ा स्याह बादल का आकररुक गया है मेरी छत पर मानोकैसा…