बेटी से बेटा भला, कहने की है बात । बेटा सुख का सारथी, सुता सहे आघात ।। सुता सहे आघात, पराई हरदम रहती । जीवन के वह दर्द, सदा ही चुप - चुप सहती ।। जाने कितने रूप,सुता यह ओढ़े लेटी । सृष्टि सृजन आधार, मगर है मानो बेटी ।।
सृष्टि सृजन आधार, मगर है मानो बेटी ।।.....मानना क्या यह तो सत्य ही है. बेटियों के हित का सुन्दर कुण्डलिया छंद रचा है आपने. हार्दिक बधाई स्वीकारें. सादर
Ashok Kumar Raktale
सृष्टि सृजन आधार, मगर है मानो बेटी ।।.....मानना क्या यह तो सत्य ही है. बेटियों के हित का सुन्दर कुण्डलिया छंद रचा है आपने. हार्दिक बधाई स्वीकारें. सादर
yesterday
Sushil Sarna
आदरणीय अशोक जी सृजन आपकी मनोहारी प्रतिक्रिया से समृद्ध हुआ । हार्दिक आभार आदरणीय जी
21 hours ago