कुंडलिया. . .बेटी

कुंडलिया. . . . बेटी

बेटी  से  बेटा   भला, कहने   की   है   बात ।
बेटा सुख का   सारथी, सुता   सहे  आघात ।।
सुता   सहे    आघात, पराई   हरदम   रहती ।
जीवन के वह दर्द, सदा ही चुप - चुप सहती ।।
जाने   कितने  रूप,सुता   यह   ओढ़े    लेटी ।
सृष्टि  सृजन  आधार, मगर  है   मानो   बेटी ।।

सुशील सरना / 20-1-26

मौलिक एवं अप्रकाशित 

  • Ashok Kumar Raktale

    सृष्टि  सृजन  आधार, मगर  है   मानो   बेटी ।।.....मानना क्या यह तो सत्य ही है. बेटियों के हित का सुन्दर कुण्डलिया छंद रचा है आपने. हार्दिक बधाई स्वीकारें. सादर 

  • Sushil Sarna

    आदरणीय अशोक जी सृजन आपकी मनोहारी प्रतिक्रिया से समृद्ध हुआ । हार्दिक आभार आदरणीय जी