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Dayaram Methani
  • Male
  • Bhilwara - rajsthan
  • India
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Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-131
"जीवन की भागमभाग पर सुंदर सृजन। वस्तुत: सभी भाग रहे बिना किसी विशेष उद्देश्य के। बहुत बहुत बधाई आपको।"
Sunday
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-131
"प्रोत्साहन के लिए बहुत अहुत आभार आदरणीय डॉ. विजय शंकर जी।"
Sunday
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-131
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी, प्रोत्साहन के लिए बहुत अहुत आभार।"
Sunday
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-131
"अति सुंदर सीख भरे दोहे आदरणीय लक्ष्मण धामी जी। हार्दिक बधाई स्वीकार करें।"
Sunday
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-131
"आदरणीय चेतन प्रकाश जी, सुंदर रचना के लिए बधाई।"
Saturday
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-131
"आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव जी, सुंदर रचना हेतु बधाई स्वीकार करें किंतु रचना अंत में पटरी से अलग हो गई है। सारी रचना में तुकांत ना है जबकि अंतिम युग्म में आपने सिखाना है व पहुँचाना है कर दिया है आप देख लें। सादर।"
Saturday
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-131
"मुझे कुछ कहना है------------अपने वतन में भूख और बीमारी की भरमार हैगांव गली के दफ्तर में हैआकंठ भ्रष्टाचार है।देखें जिधर होती उधर जाति मजहब के नामपर तकरार है।हर तरफभेदभाव ईर्ष्या द्वेषऔर अत्याचार है।देश के कर्णधारोंमें ज्ञान अज्ञान काबहुत अहंकार…"
Saturday
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-77
"सुंदर सीख भरी लघु कथा। बधाई आदरणीय तेजवीर सिंह जी।"
Aug 31
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 124 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय रक्ताले जी, प्रदत्त चित्र पर सुंदर रचना हेतु बधाई स्वीकार करें।"
Aug 21
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 124 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय समर कबीर जी, प्रदत्त चित्र पर भुजंगप्रयात छंद में सुंदर रचना हेतु बधाई स्वीकार करें। लगातार दो पदों में यार का तुकांत ठीक नहीं होता। सादर।"
Aug 21
Dayaram Methani joined Admin's group
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चित्र से काव्य तक

"ओ बी ओ चित्र से काव्य तक छंदोंत्सव" में भाग लेने हेतु सदस्य इस समूह को ज्वाइन कर ले |See More
Aug 21
Dayaram Methani commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post सहज त्योहार है राखी -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"राखी के त्यौंहार पर अति सुंदर रचना के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार करें।"
Aug 19
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-130
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी, अति सुंदर रचना के लिए बहुत बहुत बधाई। आपकी लेखनी को नमन।"
Aug 14
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-129
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी, प्रोत्साहन के लिए हार्दिक आभार।"
Jul 18
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-129
"आदरणीय चेतन प्रकाश जी, अति सुंदर, सामयिक एवं देश भक्ति पूर्ण दोहों के लिए बहुत बहुत बधाई आपको।"
Jul 18
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-129
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी, प्रदत्त विषय के अनुकूल बहुत संदर दोहे। बधाई।"
Jul 18

Profile Information

Gender
Male
City State
BHILWARA
Native Place
BHILWARA
Profession
journlist and writer
About me
I like to read and write kavita, gazal, short stories and artical.

Dayaram Methani's Blog

ग़ज़ल

 2122 2122 2122 212

नाव है मझधार में नाविक नशे में चूर है

सांझ है होने लगी मंजिल नज़र से दूर है

संकटों से आदमी क्या देव भी बचते नहीं

वक्त के आगे सभी होते यहां मजबूर है

जिन्दगी की कशमकश में जीना’ जिसको आ गया

यों समझ लो हौसलों से वो बहुत भरपूर है

दोष है अपना समय के साथ चल पाये नहीं

बंद मुट्ठी से फिसलना वक्त का दस्तूर है

हाल ‘‘मेठानी’’ बतायंे क्या किसी को अब यहां

आदमी सुनता नहीं अब हो गया मगरूर…

Continue

Posted on August 27, 2019 at 10:00pm — 2 Comments

गज़ल सीख लो

2122 2122 212

दर्द को दिल में दबाना सीख लो

ज़िन्दगी में मुस्कराना सीख लो

आंख से आंसू बहाना छोड़िये

हर मुसीबत को भगाना सीख लो

ज़िन्दगी है खेल, खेलो शान से

खेल में खुद को जिताना सीख लो

फूल को दुनिया मसल कर फैंकती

खुद को कांटों सा दिखाना सीख लो

छोड़ दें अब गिड़गिड़ाना आप भी

कुछ तो कद अपना बढ़ाना सीख लो

थी जवानी जोश भी था स्वप्न भी

दिन पुराने अब भुलाना सीख लो

कौन…

Continue

Posted on July 4, 2019 at 9:30pm — 8 Comments

झूठ का व्यापार - ग़ज़ल

मापनी: 2122 2122 2122 212

झूठ का व्यापार बढ़ता जा रहा है आजकल,

और हर इक पर नशा ये छा रहा है आजकल

है लड़ाई का नजारा हर तरफ देखें जिधर,

आदमी ही आदमी को खा रहा है आजकल

इस प्रगति के नाम पर ही मिट रहे संस्कार सब

झूठ को हर आदमी अपना रहा है आजकल

बाँटकर भगवान को नेता खुशी से झूमकर

काबा’ तेरा काशी’ मेरी गा रहा है आजकल

जाग ‘मेठानी’ बचायें आग से अपना चमन

नित नया जालिम जलाने आ रहा है…

Continue

Posted on April 8, 2019 at 2:01pm — 7 Comments

ग़ज़ल

ग़ज़ल

मापनी: 2122 2122 2122 212

आंख से आंसू कभी यों ही बहाया ना करो

दर्द दिल का भी जमाने को बताया ना करो

हर किसी को मुफ्त में कोई खुशी मिलती नहीं

मेहनत से आप अपना जी चुराया ना करो

जिन्दगी ले जब परीक्षा हौसलों से काम लो

आपदा के सामने खुद को झुकाया ना करो

हैं सफलता और नाकामी समय का खेल ही 

लक्ष्य से अपनी नजर को तो हटाया ना करो

जीत लेंगे जिन्दगी की जंग ’मेठानी‘ सुनो

तुम निराशा को कभी मन में बसाया ना…

Continue

Posted on March 15, 2019 at 1:14pm — 5 Comments

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At 10:09pm on May 24, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय दयाराम मेथानि जी आदाब बहुत बहुत शुक्रिया जनाब
 
 
 

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