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अजेय
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अजेय's Discussions

कैलेंडर

नौ तारीख तक कैलेंडर न आने से असुविधा होती है। यदि पहले से निर्धारित हो और 1-2 तारीख तक कैलेंडर आ जाए तो आसानी हो जाये।उम्मीद है आयोजक इस और ध्यान देंगेContinue

Started Apr 9, 2018

 

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Latest Activity

अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-132
"आपकी जानकारी के लिये बता दूँ कि इस मिसरे में सहीह लफ़्ज़ "वज्ह" 21 है // तो ऐसे कर दें कि : वज्ह भी तो हो कोई हद से गुजरने के लिए . जो अंत में एक मात्रा अधिक लेने की छूट है क्या वो अलग से अक्षर नहीं हो सकता समर साहब. कृपया बताएं "
Jun 26
अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-132
"धन्यवाद लक्ष्मण जी "
Jun 26
अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-132
"इन उत्साहवर्धक शब्दों के लिए धन्यवाद मुनीश जी "
Jun 26
अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-132
"आपका अत्यंत आभार ऋचा जी "
Jun 26
अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-132
"जी बहुत शुक्रिया अनीस जी "
Jun 26
अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-132
"बहुत बहुत आभार समर साहब. आप का एक एक शब्द हमें और बेहतरी की और ले जाता है. कौशिश रहती हैं निरंतर सक्रीय रहने की पर कभी कभी मसरुफ़ियत ऐसी हो जाती है कि चाह कर भी हो नहीं पाता. और जिसे हम खुद ही हल्का महसूस करें उसे अब यहाँ लाने का हौसला भी नहीं…"
Jun 26
अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-132
"बेहद आभार राजेश जी. आपने बहुत हौसला दिया "
Jun 26
अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-132
"शुक्रिया दण्डपाणी जी "
Jun 26
अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-132
"शुक्रिया सुरेन्द्र जी "
Jun 26
अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-132
"बहुत आभार अशोक जी. आप ने उत्साह बढाया "
Jun 26
अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-132
"दर्दे-दिल को मिल गया मौका उभरने के लिए किसने बोला था उन्हें इतना सँवरने के लिए + सोचता हूँ, अलहदा हो, मैं भी कुछ ऐसा करूँपर वजह भी तो मिले हद से गुज़रने के लिए + आस तुझसे वस्ल की ही रोक लेती है मुझे वरना तो तैयार कब से हूँ मैं मरने के लिए + फ़र्क़…"
Jun 26
अजेय commented on amita tiwari's blog post दस वर्षीय का सवाल
"हा हा हा। बहुत मस्त कविता। उत्तम हास्य"
May 5
अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-126
"अच्छे दोहे कहे हैं लक्मण भाई"
Apr 16
अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-126
"क्षमा चाहूंगा चेतन जी। किन्तु जितना मैं जितना समझ पा रहा हूँ, इसमें मात्राएँ हीं हैं। कृपया इस संशय को दूर करने का कष्ट करें."
Apr 16
अजेय commented on अजेय's blog post ग़ज़ल (आदमी सी फ़ितरतें हों आदमी की)
"शुक्रिया जनाब अमीरुद्दीन अमीर जी।"
Oct 15, 2020
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on अजेय's blog post ग़ज़ल (आदमी सी फ़ितरतें हों आदमी की)
"जनाब अजेय जी आदाब, शानदार ग़ज़ल हुई है शैर दर शैर दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ। सादर।"
Oct 14, 2020

Profile Information

Gender
Male
City State
Karnal (Haryana)
Native Place
Karnal
Profession
Business
About me
ग़ज़ल, कविता, लघुकथा लेखन में रूचि, तीन स्वतंत्र काव्य संग्रह प्रकाशित, 3 ऑनलाइन पुस्तकें प्रकाशित. एक काव्य संग्रह हरियाणा साहित्य अकादमी के सौजन्य से प्रकाशित. parivartaaajkal.com पर 'अजय की कलम' के शीर्षक से नियमित कॉलम

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अजेय's Blog

ग़ज़ल (आदमी सी फ़ितरतें हों आदमी की)

कौशिशें इतनी सी हैं बस शायरी की 

आदमी सी फ़ितरतें हों आदमी की

हद जुनूँ की तोड़ कर की है इबादत

ख़ूँँ जलाकर अपना तेरी आरती की

गोलियों की ही धमक है हर दिशा में

और तू कहता है ग़ज़लें आशिक़ी की!

भूले-बिसरे लफ़्ज़ कुछ आये हवा में

कोई बातें कर रहा है सादगी की

इतनी लंबी हो गयी है ये अमावस

चाँद भी अब शक्ल भूला चांदनी की

बूँद मय की तुम पिलाओ वक़्ते-रुखसत

आखि़री ख्वा़हिश यही है ज़िन्दगी…

Continue

Posted on October 7, 2020 at 5:00pm — 6 Comments

ग़ज़ल (और कितनी देर तक सोयेंगें हम)

पल सुनहरी सुबह के खोयेंगें हम

और कितनी देर तक सोयेंगें हम।

रात काली तो कभी की जा चुकी

अब अँधेरा कब तलक ढोयेंगे हम।

जुगनुओं जैसा चमकना सीख लें 

रोशनी के बीज फिर बोयेंगे…

Continue

Posted on September 19, 2020 at 11:20pm — 16 Comments

एक ग़ज़ल (वैलेंटाइन डे स्पेशल)

एक ग़ज़ल।

**********

बँध गई हैं एक दिन से प्रेम की अनुभूतियाँ

बिक रही रैपर लपेटे प्रेम की अनुभूतियाँ

शाश्वत से हो गई नश्वर विदेशी चाल में

भूल बैठी स्वयं को ऐसे प्रेम की अनुभूतियाँ

प्रेम पथ पर अब विकल्पों के बिना जीवन नहीं

आज मुझ से, कल किसी से, प्रेम की अनुभूतियाँ

पाप से और पुण्य से हो कर पृथक ये सोचिए

लज्जा में लिपटी हैं क्यों ये प्रेम की अनुभूतियाँ

परवरिश बंधन में हो तो दोष किसको दीजिये

कैसे पहचानेंगे…

Continue

Posted on February 14, 2019 at 1:54pm — 4 Comments

एक ग़ज़ल (हिलता है तो लगता ज़िंदा है साया)

हिलता है तो लगता ज़िंदा है साया

लेकिन चुप है, शायद गूँगा है साया

कहने में तो है अच्छा हमराही पर

सिर्फ़ उजालों में सँग होता है साया

सूरज सर पर हो तो बिछता पाँवों में

आड़ में मेरी धूप से बचता है साया

असमंजस में हूँ मैं तुमसे ये सुनकर

अँधियारे में तुमने देखा…

Continue

Posted on February 7, 2019 at 12:38pm — 3 Comments

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At 7:49pm on September 27, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय अजय गुप्ता जी आदाब बहुत बहुत शुक्रिया हौसला बढ़ाने का ग़ज़ल पसंद आयी तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ आपका
At 7:46pm on August 31, 2019, dandpani nahak said…
बहुत बहुत धन्यवाद् भाई साहब अजय गुप्ता जी समय निकाल कर आपने जो मेरा हौसला बढ़ाया है बहुत शुक्रगुज़ार हूँ
At 12:56pm on May 26, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय अजय गुप्ता जी आदाब आपने मेरी ग़ज़ल पढ़ी उसे सराहा उसके लिए बहुत शुक्रिया
At 12:18pm on November 23, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

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